Donald Trump News : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर एक बार फिर अपनी गहरी भड़ास और असंतोष जाहिर किया है। इस दौरान उन्होंने नॉर्वे पर जमकर निशाना साधते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की और कहा कि वह अब नॉर्वे से किसी भी नागरिक को अमेरिका में दाखिल नहीं होने देना चाहते हैं। मिशिगन में आयोजित एक विशाल चुनावी रैली के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दुनिया भर में 8 बड़ी जंगों को रुकवाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नोबेल सम्मान से दूर रखा गया।
हाल में नॉर्वे को कहा था घटिया मुल्क
डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में भड़की हिंसा का पूरा ठीकरा प्रवासियों के सिर फोड़ा था। उन्होंने नॉर्वे की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उसे एक घटिया मुल्क करार दिया। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से यह दावा ठोकते आ रहे कि उनके द्वारा किए गए बड़े कूटनीतिक प्रयासों के बदले उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा जाना चाहिए था। रैली में उन्होंने कहा कि अब उनके सामने केवल ईरान और यूक्रेन से जुड़े युद्धों का हल निकालना ही बाकी रह गया है। ट्रंप ने इस बात का भी खुलासा किया कि पुरस्कार के ऐलान से पहले उन्हें पूरी उम्मीद थी कि यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें जरूर मिलेगा। उन्होंने इस बारे में अपनी पत्नी से भी चर्चा की थी और कहा था कि नोबेल शांति पुरस्कार मिलना उनके लिए एक बहुत बड़ा सम्मान होगा।
सरकार के हाथ में नहीं होता नोबेल देने का फैसला
ध्यान देने वाली बात है कि नोबेल शांति पुरस्कार बांटने का अधिकार नॉर्वे की सरकार के पास बिल्कुल नहीं होता है। विजेता का चयन एक पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र नॉर्वेजियन नोबेल समिति करती है। इस खास कमेटी में कुल पांच सदस्य शामिल होते हैं, जिनका चुनाव नॉर्वे की संसद द्वारा किया जाता है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर पहले भी राष्ट्रपति ट्रंप को इस सच्चाई से रूबरू करा चुके हैं और स्पष्ट कर चुके हैं कि नोबेल का फैसला उनकी सरकार नहीं करती है।
2018 से लगातार नोबेल की उम्मीद लगाए बैठे हैं ट्रंप
ट्रंप की ओर से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की हसरत कोई नई बात नहीं है। सबसे पहले अक्टूबर 2018 में एक पब्लिक इवेंट के दौरान ट्रंप ने नोबेल का जिक्र किया था। तब उन्होंने निराशा जताते हुए कहा था कि भले वे उत्तर कोरिया और सीरिया जैसे इलाकों में शांति बहाल करने की जी-तोड़ कोशिश कर रहे हैं, लेकिन शायद उन्हें यह पुरस्कार कभी नसीब नहीं होगा। इसके बाद फरवरी 2019 में उन्होंने अपनी दावेदारी को बेहद मुखर होकर सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने उनका नाम नोबेल के लिए आगे बढ़ाया है, हालांकि उन्हें फिर भी लगता है कि वे इसे कभी नहीं जीत पाएंगे।
पुरस्कार वितरण की निष्पक्षता पर उठा चुके हैं सवाल
साल 2019 में ही एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने फिर कहा था कि यह पुरस्कार पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से दिया जाए तो उन्हें कई अलग-अलग उपलब्धियों के लिए नोबेल मिलना चाहिए। आगे चलकर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौर में भी ट्रंप ने नोबेल का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। उन्होंने अपनी तुलना पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से करते हुए कहा था कि जब ओबामा को यह सम्मान दिया जा सकता है तो फिर वे इसके हकदार क्यों नहीं हैं। जुलाई 2025 में नॉर्वे के वित्त मंत्री जेन्स स्टोल्टेनबर्ग के साथ हुई टेलीफोनिक बातचीत में भी ट्रंप ने नोबेल पुरस्कार हासिल करने की अपनी दबी इच्छा सामने रखी थी। इस बात की जानकारी नॉर्वे के ही एक जाने-माने अखबार की रिपोर्ट के जरिए सामने आई थी।
नवी पिल्लै को पुरस्कार मिलने पर जताई थी कड़ी नाराजगी
वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की जानी-मानी शख्सियत नवी पिल्लै को दिया गया, जिस पर ट्रम्प ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। 9 अक्टूबर को ट्रम्प ने पिल्लै पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि इस इंसान को दुनिया में कोई जानता तक नहीं है। ट्रंप ने खुलकर दावा किया था कि जब उन्होंने पूरी दुनिया में 8 बड़े युद्धों को खत्म कराने में सीधी मदद की है तो उस हिसाब से उन्हें सिर्फ एक नहीं, बल्कि पूरे 8 नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे।