H1 Visa News : अमेरिका के वीजा नियमों में आने वाले बदलावों ने फिर से भारतीय आईटी प्रोफेश्नल्स की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी एस्पोसिटो के एक हालिया बयान से हड़कंप मच गया है। उन्होंने संकेत दिया है कि अगले एक साल में H-1B वीजा व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या H-1B वीजा सच में बंद होने जा रहा। इसका भारतीय टेक पेशेवरों पर क्या असर पड़ेगा?

श्रम विभाग की जांच में क्या निकलकर आया?

अमेरिकी प्रशासन H-1B वीजा प्रणाली में हो रही गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर कड़ी नजर रख रहा है। विभाग की ओर से कई कंपनियों को समन भेजे गए हैं। कई ठिकानों पर छापेमारी भी की गई है। अधिकारियों का कहना है कि कागजी कंपनियों, फर्जी नौकरियों और वीजा के गलत इस्तेमाल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

क्या वीजा पूरी तरह बंद हो जाएगा?

इसका सीधा जवाब है कि फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। अमेरिकी सरकार ने H-1B प्रोग्राम को खत्म करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में इसे लेकर कुछ बिल जरूर पेश किए गए हैं।

End H-1B Now Act : इस प्रस्ताव में वीजा की संख्या को धीरे-धीरे घटाकर शून्य करने की बात कही गई है।

End H-1B Visa Abuse Act : इसमें नए वीजा जारी करने पर कुछ समय के लिए रोक लगाने और न्यूनतम सालाना वेतन बढ़ाकर 2 लाख डॉलर तय करने का सुझाव दिया गया है।

ये दोनों बिल फिलहाल शुरुआती चरण में हैं और इनका कानून बनना अभी तय नहीं है।

हाल में लागू हुए 4 प्रमुख बदलाव

स्पेशल फीस : अमेरिका के बाहर से बुलाए जाने वाले कर्मचारियों के आवेदनों पर भारी-भरकम फीस लगाने का प्रस्ताव लाया गया है, जिसे अदालतों में चुनौती भी दी गई है।

ग्रेस पीरियड पर सख्ती : नौकरी चले जाने के बाद अमेरिका में रुकने के लिए मिलने वाले 60 दिनों के समय को खत्म करने पर विचार चल रहा है।

स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता : कोई कंपनी अमेरिकी नागरिकों को नौकरी से निकालकर विदेशी वर्कर रखती है, तो उसके खिलाफ सख्त जांच की जाएगी।

कड़े जांच अभियान : वीजा नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर नजर रखने के लिए श्रम विभाग ने विशेष जांच अभियान शुरू किया है।

आंकड़ों पर कितना पड़ा असर?

नियमों में कड़ाई के कारण H-1B वीजा के आवेदनों में भारी कमी आई है। वित्तीय वर्ष 2024 के मुकाबले 2026 में रजिस्ट्रेशन की संख्या में आधे से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। बड़ी टेक कंपनियों की ओर से होने वाले स्पॉन्सरशिप में भी भारी कमी देखने को मिली है।