Abdul El Sayed Victory News: अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने वाशिंगटन की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। मिशिगन की बेहद चर्चित सीनेट सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने अपनी शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी माइक रोजर्स को शिकस्त देकर यह ऐतिहासिक मुकाबला अपने नाम किया है। चुनाव विश्लेषण संस्था डिसीजन डेस्क मुख्यालय (DDHQ) सहित प्रमुख मीडिया नेटवर्क ने अब्दुल अल-सैयद की विजय की घोषणा की है। मिशिगन का यह मुकाबला सिर्फ दो नेताओं की सीधी लड़ाई नहीं था, बल्कि इसे व्हाइट हाउस के पूर्व दावों और ट्रंप की जमीनी साख की असली परीक्षा माना जा रहा था। एक तरफ जहां माइक रोजर्स खुद ट्रंप के पुरजोर समर्थन के सहारे चुनावी समर में उतरे थे। दूसरी तरफ अब्दुल अल-सैयद ने स्थानीय नागरिकों से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके बाजी मार ली। इस नतीजे से अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी को बेहद मजबूत और अहम बढ़त हासिल हुई है।

वोटिंग से पहले ट्रंप का तीखा हमला और निजी छींटाकशी

चुनावी अभियान की शुरुआत से डोनाल्ड ट्रंप ने अब्दुल अल-सैयद को सीधे निशाने पर ले रखा था। वोटिंग शुरू होने से कुछ समय पहले ट्रंप ने सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा था कि अब्दुल अल-सैयद यहूदियों और अश्वेतों से नफरत करते हैं और उन्हें गोरों से भी चिढ़ है। ट्रंप ने दावा कर दिया था कि मिशिगन सीनेट रेस में केवल बेवकूफ मतदाता उन्हें अपना वोट देंगे। प्रचार अभियान के दौरान ट्रंप का आक्रामक रुख जारी रहा। उन्होंने एक जनसभा में बयान दिया था कि वह एक जिहादी और मुस्लिम ब्रदरहुड से ताल्लुक रखने वाले शख्स को अमेरिकी सीनेटर बनने से रोकने आए हैं और मिशिगन की जनता अब्दुल को हराकर दम लेगी। हद तो तब हो गई जब ट्रंप ने अपने भाषणों में अब्दुल की तुलना 9/11 के खौफनाक विमान अपहरणकर्ता आतंकियों से कर डाली थी।

बराक ओबामा का मिला मजबूत साथ

ट्रंप के इन तीखे हमलों और आक्रामक बयानों के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा खुलकर अब्दुल अल-सैयद के पक्ष में आए। एक चुनावी रैली में ओबामा ने कहा था कि विरोधी पक्ष के लोग झूठ का सहारा लेंगे, आवाम को डराएंगे और समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश करेंगे। ओबामा ने चेताया कि ये लोग आपके नाम और आस्था का इस्तेमाल आपको कम भरोसेमंद, कम देशभक्त और खतरनाक साबित करने के लिए कर सकते हैं। ओबामा ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा था कि उन्होंने खुद यह दौर झेला है और इसे साबित करने के लिए उनके पास लंबा बर्थ सर्टिफिकेट मौजूद है। उन्होंने विश्वास जताया था कि नफरत का यह तरीका जिस तरह उन पर काम नहीं कर पाया, उसी तरह मिशिगन की समझदार जनता के बीच अब्दुल के खिलाफ भी काम नहीं करेगा।

महबूबा मुफ्ती ने जताई खुशी

अब्दुल अल-सैयद की इस जीत पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि यह पल उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है। मिशिगन में अब्दुल अल-सैयद की सफलता ट्रंप के नफरती एजेंडे और इस्लामोफोबिया के खिलाफ एक कड़ा संदेश है। महबूबा मुफ्ती ने आगे लिखा कि न्यूयॉर्क में ममदानी के बाद अब मिशिगन में अल-सैयद का चुना जाना यह दिखाता है कि आखिरकार एकजुटता, सम्मान और इंसानियत की जीत हुई है। उन्होंने पूर्वाग्रह के बजाय उम्मीद का रास्ता चुनने के लिए अमेरिकी आवाम को सलाम किया।

जानिए कौन हैं अब्दुल अल-सैयद?

अब्दुल अल-सैयद पेशे से एक जाने-माने डॉक्टर, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ (पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट) और डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख राजनेता हैं । उन्होंने मिशिगन की वेन काउंटी में हेल्थ डायरेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दी हैं। मूल रूप से मिस्र के प्रवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाले अब्दुल की गिनती उन गिने-चुने जमीनी नेताओं में होती है जो नागरिकों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुविधाएं (यूनिवर्सल हेल्थकेयर) देने और महंगाई जैसे रोजमर्रा के संकटों से राहत दिलाने के पक्षधर रहे हैं।

भारत के कर्नाटक राज्य से जुड़ा है पत्नी का गहरा नाता

अमेरिकी सीनेट चुनाव में जीत दर्ज करने वाले अब्दुल अल-सैयद की पारिवारिक जड़ें भारत से भी जुड़ी हुई हैं। उनकी पत्नी सारा जुकाकू का भारत के कर्नाटक राज्य से बेहद गहरा संबंध है। सारा के पिता डॉ. जुकाकू एस. तैयब का बचपन कर्नाटक के भटकल में बीता था। वहीं उनके दादा जेएच शम्सुद्दीन जुकाकू मैसूर राज्य में उप वित्त मंत्री रहने के साथ-साथ एक प्रतिष्ठित वकील और शिक्षाविद थे। सारा का जन्म अमेरिका के मिशिगन में एक भारतीय प्रवासी परिवार में हुआ था। वह पेशे से साइकोलॉजिस्ट हैं और उन्होंने प्रतिष्ठित कोलंबिया यूनिवर्सिटी से अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की है। अब्दुल और सारा की पहली मुलाकात मिशिगन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों ने साल 2006 में शादी कर ली और आज वे दो बेटियों के माता-पिता हैं।