पश्चिन बंगाल के उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने (AITC) आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और सिंबल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। चुनाव आयोग के इस ऐलान के बाद TMC और उसके विरोधी दलों से पसंदीदा तीन-तीन नए नाम और सिंबल मांगे हैं, जो उनको 18 सितंबर सुबह 11 बजे से पहले देने थे। इसी के साथ राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग के इस फैसले पर जमकर सवाल भी उठाए हैं।
नाम और सिंबल किए गए फ्रीज
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में आपसी विवाद काफी समय से चल रहा है। उसके बाद ही चुनाव आयोग ने पार्टी के बंटवारे को स्वीकार करते हुए अपना ये फैसला सुनाया और दोनों ही गुटों को पार्टी के नाम और सिंबल को इस्तेमाल करने से फ्रीज कर दिया। चुनाव आयोग ने कहा कि दोनों पक्ष अब अपने नए नाम और सिंबल के साथ ही उपचुनाव लड़ेंगे और ये भी कहा कि फैसला तब तक लागू रहेगा, जब तक पार्टी के बंटवारे का अंतिम फैसला नहीं आ जाता। EC का कहना है कि दोनों पक्षों ने बंटवारे के बाद असली पार्टी होने का दावा किया है, जिसके कारण अब चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत चुनाव आयोग ऐसा एक ठोस फैसला लेने पर मजबूर है।
ममता बनर्जी ने भेजे नए नाम और सिंबल
ममता बनर्जी के अंतर्गत बने नए पक्ष ने कल देर रात ही चुनाव आयोग को अपनी पसंद के नाम और सिंबल प्राथमिकता के आधार पर भेज दिए हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने आयोग के इस फैसले का जमकर विरोध भी किया। पार्टी ने नए नाम और सिंबल गुरूवार की रात करीब 11:36 बजे चुनाव आयोग को ईमेल के जरिए भेजे थे। अब दोनों पार्टियों की तरफ से चुनाव आयोग को अलग-अलग नाम और सिंबल भेज दिए गए हैं, जिसमें से आयोग दोनों गुटों के लिए एक-एक नाम और सिंबल निर्धारित करेगा।
किसको सौंपा गया कौन-सा नाम और चिह्न?
आज 18 सितम्बर को चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के नाम और सिंबल सौंपने वाले मामले में अपना फैसला सुना दिया है। दोनों ही गुटों को उनके दिए हुए विकल्पों में से चुनकर अलग-अलग नाम और चिह्न निर्धारित कर दिए गए हैं। ममता बनर्जी के अंतर्गत बनी पार्टी को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिह्न मिला है। वहीं, विरोधी दल अरूप रॉय के अंतर्गत बनी पार्टी को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ का चिह्न निर्धारित किया गया है। अब दोनों पक्ष इन नए नाम और सिंबल के साथ 6 अक्टूबर के नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के मैदान में उतरने को तैयार हैं और इन्हें अनुमति भी मिल चुकी है।
राहुल गांधी की विवाद में एंट्री
दोनों पक्षों और EC के विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भी एंट्री हो चुकी है। उन्होंने चुनाव आयोग के इस फैसले पर कई सवाल उठाए हैं और कठोर बातें भी बोली हैं। उन्होंने BJP (भारतीय जनता पार्टी) और EC पर निशाना साधते हुए आरोप लगाए हैं कि ये पहली बार नहीं है। उन्होंने EC और BJP पर पार्टी तोड़ने के आरोप लगाते हुए शिवसेना का उदाहरण दिया, फिर NCP और अब TMC के मामले में एक जैसे पैटर्न देखने की बात भी रखी। उन्होंने इसे 'वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी' कहते हुए ये कहा कि ये अब सिर्फ TMC की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि हर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग करने वाले मतदाता की लड़ाई बन चुकी है।