Donald Trump News : अमेरिका में भारी महंगाई के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी रैली में ऐसा मजाक किया है, जिसने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कहा, किसी के पास 5000 डॉलर हैं तो वह उनके फ्लोरिडा स्थित आलीशान रिसॉर्ट मार-ए-लागो में एक हैमबर्गर खरीदने में खर्च हो सकते हैं। दिलचस्प बात रही कि महंगाई के मुद्दे पर घिरे ट्रंप की इस बात पर समर्थक नाराज होने के बजाय तालियां बजाने लगे।

चर्चा क्यों छिड़ी?

मगर, सवाल उठता है कि अचानक इस जगह की चर्चा क्यों छिड़ गई है? दरअसल, मिडटर्म चुनाव के सिलसिले में जनता के बीच प्रचार कर रहे ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान इस आलीशान ठिकाने का हवाला देकर अपनी अमीरी का जलवा दिखाया। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने ही देश के मतदाताओं की चुटकी लेते हुए कह दिया कि अगर तुम्हारी जेब में सिर्फ 5000 डॉलर हैं तो इस रिसॉर्ट का रुख मत करना, क्योंकि इतने पैसों में शायद एक अदद बर्गर मिल पाना भी मुश्किल है। बता दें, ट्रंप ने नागरिकों को 5000 डॉलर देने का वादा किया है। यह भारतीय रुपए में पौने पांच लाख रुपए है। ट्रंप का यह बयान ऐसे नाजुक दौर में आया है, जब देश में महंगाई आसमान छू रही। जनता की जेब की ताकत आने वाले चुनावों का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है। दिलचस्प बात रही कि टेक्सास की कॉर्पस क्रिस्टी में हुई इस रैली में जैसे ही ट्रंप ने यह बात कही, वहां मौजूद उनके समर्थक हंसने लगे। तालियां बजाने लगे।

'देश के बाहर नहीं जाने चाहिए पैसे'

ट्रंप ने यह भरोसा दिलाया है कि रिपब्लिकन पार्टी संसद के दोनों अंगों यानी प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर अपना दबदबा कायम रखती है तो देश के हर बालिग नागरिक के खाते में 5000 डॉलर का चेक भेजा जाएगा। रैली के मंच से उन्होंने समर्थकों को समझाया कि वे इस रकम को फ्लोरिडा या देश के किसी भी कोने में खर्च कर सकते हैं, बस शर्त है कि यह पैसा देश के बाहर नहीं जाना चाहिए। मार-ए-लागो का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, "फ्लोरिडा की तरफ आइए, हमारे किसी भी बेहतरीन मुकाम पर पधारिए। आप मार-ए-लागो आ सकते हैं और वहाँ मेरे खास मेहमान बन सकते हैं। मगर पेंच यह है कि 5000 डॉलर में आप ज्यादा से ज्यादा एक हैमबर्गर और शायद एक छोटी सी मिठाई ही खरीद पाएंगे। मुझे तो इस बात का भी शक है कि इतने में वो भी नसीब होगा या नहीं। इसलिए बेहतर है कि आप वहाँ न जाएं। अगर आप पैसों का मोल समझते हैं, तो वो जगह आपके लिए बिल्कुल ठीक नहीं है।"

विवादों में घिरा दांव

ट्रंप का यह दांव पहले से सियासी गलियारों में विवादों के घेरे में है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के दिग्गज नेताओं के साथ-साथ खुद ट्रंप खेमे के कुछ लोगों ने भी इस लुभावने ऑफर का उपहास उड़ाया है। आलोचकों का साफ तौर पर कहना है कि चुनाव सिर पर आते ही इस तरह नगद रुपये बांटने का शिगूफा छोड़ना केवल जनता को बहकाने और वोट बटोरने की एक चाल है। जानकारों के अनुमान के मुताबिक देश के वयस्क नागरिकों को 5000 डॉलर राशि दी जाती है तो सरकार के खजाने पर 1.3 ट्रिलियन डॉलर का बोझ पड़ सकता है। इतनी बड़ी राशि का इंतजाम करना और इस भुगतान की पूरी रूपरेखा को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। इसके लिए संसद की औपचारिक मंजूरी सहित कई प्रशासनिक कदम उठाने पड़ेंगे।

कैसी है अमेरिकी लोगों की आर्थिक स्थिति?

दूसरी तरफ ट्रंप दावा कर रहे कि देश की अर्थव्यवस्था बहुत शानदार ट्रैक पर दौड़ रही। वह रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने और महंगाई की मार को लेकर जताई जा रही चिंताओं को विपक्ष यानी डेमोक्रेट्स की गढ़ी चाल बताते आए हैं। हालांकि, आम आदमी की आर्थिक बदहाली की हकीकत कुछ और कहानी बयां करती है। मशहूर प्यू रिसर्च सेंटर के ताजा सर्वे के मुताबिक 60 फीसदी अमेरिकी इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनकी कमाई इतनी नहीं है कि वे अपनी पसंद की जिंदगी जी सकें। 70 फीसदी लोगों ने माना है कि तंगी के चलते उन्होंने बाहर होटल में खाना खाने जैसे फालतू खर्चों पर कैंची चला दी है। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच 5000 डॉलर देने का वादा और मार-ए-लागो के बर्गर पर ट्रंप के तंज ने चुनावी बहस को पूरी तरह गर्मा दिया है। 

3 नवंबर को होगा मतदान

3 नवंबर को होने वाले चुनावों में संसद की कुर्सियों का भविष्य तय होना है। इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों के अलावा सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मुकाबला होना है। अभी संसद के दोनों सदनों पर रिपब्लिकन पार्टी का ही कब्जा है। सीनेट की बात करें तो वहां रिपब्लिकन के पास 53 और डेमोक्रेट्स के पास 47 सीटें हैं। इनमें इस बार रिपब्लिकन की 22 और डेमोक्रेट्स की 13 सीटों पर दांव लगा है। सीनेट की बाजी अपने पाले में करने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी को अपनी सभी 13 सीटें तो बचाकर रखनी ही होंगी। साथ ही रिपब्लिकन खेमे से कम-से-कम चार सीटें छीननी होंगी।

गवर्नरों के लिए भी होगा चुनाव

उधर, प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के पास 218 और डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं, जबकि एक सीट किसी निर्दलीय के पास है और दो सीटें खाली पड़ी हैं। साथ ही देश के 50 में से 36 राज्यों में नए गवर्नरों के चुनाव के लिए भी मतदान कराए जाएंगे। ओहायो जैसे मजबूत रिपब्लिकन गढ़ में भारतीय मूल के नेता विवेक रामास्वामी और डेमोक्रेटिक प्रत्याशी एमी एक्टन के बीच होने वाली टक्कर ने राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। अमूमन मिडटर्म चुनावों के दौरान सत्ताधारी पार्टी को जनता के गुस्से और विरोध की लहर का सामना करना पड़ता है। इस बार भी आसमान छूती महंगाई, पेट्रोल-डीजल के दाम और आम जनता की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति चुनाव परिणामों को पूरी तरह प्रभावित करने का दम रखती है।