ACP Vivek Bhagat News : विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत पर लगे छेड़खानी के सनसनीखेज आरोपों की सच्चाई सामने आ गई है। दिल्ली पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि एसीपी पर आरोप लगाने वाली महिला फर्जी पत्रकार निकली और यह पूरी घटना पुलिस महकमे को बदनाम करने की एक पूर्व-नियोजित साजिश का हिस्सा थी।

युवक ने एआई से बनाया था फर्जी वीडियो

दिल्ली पुलिस की संयुक्त आयुक्त (ज्वाइंट सीपी) नूपुर प्रसाद ने बताया कि एसीपी विवेक भगत को निशाना बनाने के लिए एक गहरी साजिश रची गई थी। दरअसल, जुलाई में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसके बाद से ही वे असामाजिक तत्वों के निशाने पर थे। उस हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें 10 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। ताजा मामले में सोशल मीडिया पर एक फर्जी पेज बनाकर और मॉर्फ्ड तस्वीरों का सहारा लेकर एसीपी पर युवती से बदसलूकी के बेबुनियाद आरोप गढ़े गए, जिस सीसीटीवी फुटेज का हवाला देकर विवेक भगत पर आरोप लगाए गए, उसमें वे मौके पर मौजूद ही नहीं थे। इस फर्जीवाड़े के सिलसिले में नई दिल्ली जिले के साइबर सेल ने हरियाणा के पलवल से नदीम को गिरफ्तार किया है। उसने एआई (AI) की मदद से फर्जी वीडियो बनाकर उसे वायरल किया था।

पुलिस का कड़ा रुख और अन्य खुलासे

पुलिस का कहना है कि फर्जी आरोप लगाने वाली महिला के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामला दर्ज किया जा सकता है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही कि गिरफ्तार आरोपी का संबंध किसी राजनीतिक दल या संगठन से है या नहीं। इसके अलावा दो अन्य महिलाओं द्वारा पुलिसकर्मियों पर लगाए गए छेड़खानी के आरोपों की पड़ताल की गई, जो जांच में बेबुनियाद साबित हुए हैं। जंतर-मंतर और संसद मार्ग इलाके में बिना इजाजत प्रदर्शन करने और धारा-144 का उल्लंघन करने के आरोप में अब तक 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

जांच पूरी होने तक एसीपी का प्रोमोशन रुका

दूसरी ओर विवाद के चलते एसीपी विवेक भगत का अस्थायी प्रोमोशन रोक दिया गया है। दिल्ली सरकार के आधिकारिक आदेश के तहत दानिप्स कैडर के 12 अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त का पदभार सौंपा गया था, जिसमें विवेक भगत का नाम भी शामिल था।

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर दिया अपडेट

दिल्ली सरकार ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि एसीपी विवेक भगत ने खुद स्वेच्छा से यह आग्रह किया है कि जब तक क्राइम ब्रांच की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे एडीसीपी का नया कार्यभार स्वीकार नहीं करेंगे। उनके इस आग्रह को स्वीकार कर सरकार ने 5 अक्टूबर के आदेश में संशोधन किया है। अब यह प्रोमोशन आदेश शेष 11 अधिकारियों (डॉ. विकास श्योकंद, ए वेंकटेश, गुरसेवक सिंह, रेनू लता, विदुषी कौशिक, मनु हिमांशु, सकारिया मिहिर प्रवीणभाई, गरिमा तिवारी, आशीष कुमार, मनीष लाडला और रोहित गुप्ता) के लिए पुन: जारी किया जा रहा है। बता दें, जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान बदसलूकी के आरोपों के बाद क्राइम ब्रांच को मामले की जांच सौंपी गई थी, जिसकी निष्पक्ष जांच अभी जारी है।