Opposition Protest March : विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विवादों और निर्वाचन प्रक्रिया की कथित अनियमितताओं को लेकर 19 विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन ने आज केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की मांग के साथ विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर स्थित मकर द्वार से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) की ओर सेव डेमोक्रेसी मार्च निकाला। हालांकि, दिल्ली पुलिस द्वारा लगाए गए कड़े पहरे और बैरिकेडिंग के कारण सांसदों को बीच रास्ते में रोक दिया गया, जिसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इस प्रदर्शन का आह्वान 30 सितंबर को 19 विपक्षी दलों की बैठक में लिया गया था। वैसे, दिल्ली में हो रहे इस मार्च से आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रमुक (DMK) ने दूरी बनाकर रखी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि SIR की आड़ में देश के लगभग 13 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन

प्रदर्शन को देखते हुए संसद मार्ग, जंतर-मंतर, अशोक रोड, कनॉट प्लेस, पटेल चौक और निर्वाचन आयोग मुख्यालय के बाहर काफी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। सेंट्रल दिल्ली में सुबह 8 बजे से ट्रैफिक को कंट्रोल और डायवर्ट किया जा रहा है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों को जंतर-मंतर एवं संसद मार्ग के आसपास अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

विपक्ष की 3 प्रमुख और गैर-समझौतावादी मांगें

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शन से एक दिन पूर्व सोशल पर कहा था कि विपक्षी गठबंधन की तीन मांगें पूरी तरह से गैर-समझौतावादी हैं:-

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा।
  • विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रद्द करना।
  • आगामी चुनाव केवल ईवीएम की जगह बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराना।

'14 बार दर्ज कराई गई आपत्ति'

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए विपक्षी नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार अन्य दो चुनाव आयुक्तों-सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों और जारी आदेशों पर 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्तियां जताई थीं। दावा किया गया है कि कई महत्वपूर्ण निर्णय इन दोनों चुनाव आयुक्तों को बिना जानकारी दिए या उनकी सिफारिशों के बिना ही लागू कर दिए गए।

विपक्षी दिग्गजों का तीखा हमला और बयानबाज़ी

अखिलेश यादव (सपा प्रमुख): निर्वाचन आयोग की कार्यशैली और निष्पक्षता पर सवाल नए नहीं हैं। आयोग की गतिविधियां देखकर ऐसा लगता है मानो केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता ही देश के असली नागरिक हैं और सिर्फ उन्हें ही मतदान का अधिकार है। आयोग पूरी तरह सत्ताधारी दल के हित में काम कर रहा है।

धर्मेंद्र यादव (सपा सांसद) : जब से SIR की घोषणा हुई है, अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी लगातार इसके खिलाफ मुखर हैं। अन्य दो चुनाव आयुक्तों के रुख से भी साफ हो गया है कि ज्ञानेश कुमार तानाशाही रवैये से देश के संविधान, कानून और लोकतंत्र के खिलाफ मनमाने फैसले ले रहे हैं। जब तक उन्हें हटाया नहीं जाता, यह आंदोलन जारी रहेगा।

मनोज झा (RJD सांसद ): सुप्रीम कोर्ट के कल के रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी गई थी और सभी एकतरफा फैसलों को निरस्त किया जाना चाहिए। जब अदालत यह कह चुकी है तो फिर अब किस बात की तैयारी? ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में निष्पक्ष चुनाव की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

कल्याण बनर्जी (TMC सांसद) : मताधिकार छीनने वाले 'वोट चोर' ज्ञानेश कुमार को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

उदित राज (कांग्रेस नेता ): ज्ञानेश कुमार को आज नहीं तो कल अपना पद छोड़ना ही पड़ेगा। पद से हटने के बाद उन्हें करोड़ों नागरिकों के वोटिंग राइट्स छीनने के इस जुर्म की कानूनी सजा भुगतनी होगी। इस तरह के हथकंडों से बनी सरकारें पूरी तरह गैर-कानूनी हैं।

हिबी ईडन (कांग्रेस सांसद) : वर्तमान में भारत का चुनाव आयोग तानाशाही का नया चेहरा बन चुका है। जाति और धर्म के आधार पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। राहुल गांधी लगातार प्रामाणिक आंकड़ों के साथ चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन ज्ञानेश कुमार सत्ताधारी दल की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं।

विजय कुमार हांसदक (JMM सांसद): चुनावी प्रक्रिया में सरकारी मशीनरी और सुरक्षा बलों का अनुचित इस्तेमाल कर कई राज्यों के चुनाव परिणामों को भाजपा के पक्ष में मोड़ने का प्रयास किया गया। अब तो केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि खुद चुनाव आयोग के अंदर से भी नियुक्तियों और फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं।

संसद में संख्या बल और गठबंधन की स्थिति

इस राष्ट्रव्यापी अभियान और प्रदर्शन में शामिल 19 राजनीतिक दलों के पास संसद के दोनों सदनों में कुल मिलाकर मजबूत संख्या बल है। लोकसभा में इन दलों के 178 और राज्यसभा में 62 सांसद हैं। ज्ञात हो इससे पहले 11 अगस्त 2025 को भी राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और शरद पवार की अगुवाई में 25 विपक्षी दलों ने संसद से चुनाव आयोग तक ऐसा ही विशाल विरोध मार्च निकाला था।

मार्च में शामिल 19 प्रमुख दल

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी - शरदचंद्र पवार (NCP-SP), शिवसेना (UBT), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPM, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), भाकपा-माले (CPI-ML), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), केरल कांग्रेस-मणी (KC-M), मरुमलारची द्रविड मुन्नेत्र कझगम (MDMK), विदुथलाई चिरुथाईगल काची (VCK), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB) और केरल कांग्रेस - जोसेफ (KC-J)।