अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक फैसले ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने मतदान प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए देश के सभी 50 राज्यों में करीब 1,000 चुनाव मॉनिटर और ऑब्जर्वर तैनात किए। विभाग ने इसे अपने इतिहास का सबसे बड़ा चुनाव निगरानी अभियान बताया है। इस कदम को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं और मतदान अधिकार संगठनों ने मतदाताओं को डराने की आशंका जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन मॉनिटरों की तैनाती उन इलाकों में भी की गई है, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस को समर्थन मिला था। रॉयटर्स के विश्लेषण के अनुसार, निगरानी के लिए चुने गए करीब दो-तिहाई क्षेत्रों में हैरिस को ट्रंप से अधिक वोट मिले थे।
न्याय विभाग ने बताया चुनावी पारदर्शिता का कदम
अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि मॉनिटर संघीय मतदान कानूनों के पालन पर नजर रखेंगे। विभाग के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है। सिविल राइट्स डिवीजन की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों ने भी इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि विभाग निष्पक्ष और भेदभाव रहित तरीके से चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है। हालांकि, मॉनिटर मतदान केंद्रों पर जांच नहीं कर सकते और न ही किसी मतदाता को वोट डालने से रोक सकते हैं। उनकी भूमिका चुनावी प्रक्रिया के निरीक्षण तक सीमित है।
डेमोक्रेटिक नेताओं ने जताई मतदाताओं को डराने की आशंका
मॉनिटरों की तैनाती को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं और मतदान अधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में संघीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी से खासकर अश्वेत और लातीनी समुदायों के मतदाताओं में डर या असमंजस पैदा हो सकता है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि राज्य अपने पर्यवेक्षक तैनात कर संघीय मॉनिटरों की गतिविधियों पर नजर रखेगा। वहीं, लॉस एंजिल्स की मेयर कैरेन बास ने इस कदम को मतदाताओं को डराने की कोशिश बताया।
चुनाव केंद्रों पर मॉनिटरों की भूमिका को लेकर अदालत के निर्देश
मॉनिटरों की तैनाती के खिलाफ NAACP ने अदालत का रुख किया था। संगठन ने आशंका जताई थी कि संघीय अधिकारियों की मौजूदगी मतदान के अधिकार और स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। संघीय न्यायाधीश ने मॉनिटर तैनात करने पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही न्याय विभाग को निर्देश दिया कि मॉनिटर प्रशासनिक या लिपिकीय कर्मचारी हों, उनके पास हथियार या गिरफ्तारी का अधिकार न हो और वे वर्दी या संघीय एजेंसी की पहचान बताने वाले चिह्न न पहनें। उन्हें मतदाताओं या चुनाव अधिकारियों के काम में दखल देने से भी रोका गया है।
चुनाव नतीजों को लेकर भी बढ़ी राजनीतिक खींचतान
मॉनिटरों की तैनाती ऐसे समय हुई है, जब ट्रंप और उनके सहयोगी पहले भी अमेरिकी चुनाव प्रणाली में गड़बड़ी के आरोप लगाते रहे हैं। डेमोक्रेटिक नेताओं और मतदान अधिकार समूहों को आशंका है कि यदि नतीजे ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में नहीं रहे, तो प्रशासन चुनाव परिणामों पर सवाल उठा सकता है। इस बीच, कैलिफोर्निया में मेल-इन बैलेट को लेकर ट्रंप प्रशासन और राज्य सरकार के बीच कानूनी विवाद भी चर्चा में रहा है। ऐसे माहौल में चुनाव निगरानी को लेकर दोनों राजनीतिक खेमों के बीच अविश्वास और बढ़ गया है।