यूपीआई भुगतान को लेकर बड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 2000 रुपये से अधिक के कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी गई है। इस याचिका पर सोमवार, 28 सितंबर को सुनवाई होनी है।यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि करीब छह साल से अधिक समय से UPI के ज्यादातर लेनदेन पर MDR की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी। नए नियम के तहत चुनिंदा मर्चेंट भुगतान पर शुल्क व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम

नए ढांचे के मुताबिक, 2000 रुपये से अधिक के पात्र P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR निर्धारित किया गया है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजेक्शन पर इसकी अधिकतम फीस 300 रुपये तय की गई है। वहीं, 2000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांसफर भी राशि की सीमा के बिना इस शुल्क से बाहर रहेंगे। सरकार के अनुसार, लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन पर नए MDR का कोई असर नहीं पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट में क्या चुनौती दी गई?

अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दायर जनहित याचिका में नए MDR ढांचे की वैधानिकता और इसे लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शुल्क व्यवस्था पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक विचार-विमर्श के बिना लाई गई है। याचिकाकर्ता ने 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR व्यवस्था को चुनौती दी है।

किन UPI भुगतान पर कितना शुल्क?

सामान्य तौर पर 2000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR 0.4 प्रतिशत रखा गया है। वहीं कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे निर्धारित क्षेत्रों में 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR रखा गया है। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉक ब्रोकर या डीलर से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR का प्रावधान है, इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।

क्या ग्राहकों से सीधे लिया जाएगा चार्ज?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई टैक्स नहीं है और इसे सरकार या NPCI द्वारा सीधे वसूला नहीं जाएगा। यह भुगतान से जुड़े अलग-अलग पक्षों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। सरकारी ढांचे में यह भी कहा गया है कि छोटे कारोबारियों और आम उपयोगकर्ताओं पर अतिरिक्त बोझ कम रखने के लिए कई श्रेणियों को शुल्क से बाहर रखा गया है।

आज CJI की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की 28 सितंबर की cause list के अनुसार मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट नए MDR ढांचे को लेकर दायर याचिका पर क्या रुख अपनाता है और 15 अक्टूबर से प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर कोई अंतरिम आदेश देता है या नहीं।