Rape Allegation On Ballia BJP Leader : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर से बड़ा विवाद सामने आया है। पार्टी की ही 35 वर्षीय एक महिला पदाधिकारी ने भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा और उनके करीबियों पर कई बार दुष्कर्म करने और उनके प्राइवेट वीडियो वायरल करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं, क्योंकि पीड़िता का दावा है कि पुलिस ने दबाव बनाकर मुख्य आरोपी का नाम एफआईआर (FIR) से हटवा दिया।
कोर्ट में हलफनामा देकर खोली पुलिस की पोल
पीड़िता ने 28 सितंबर को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लिखित हलफनामा दाखिल किया। उसका कहना है कि पुलिस की तरफ से उसका निष्पक्ष बयान दर्ज नहीं किए जाने के कारण उसे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत को सौंपे गए दस्तावेजों में महिला ने कहा कि शुरुआत में उसने बांसडीह थाने में जो लिखित शिकायत सौंपी थी, उसमें बीजेपी जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा का नाम प्रमुखता से शामिल था। मगर, आरोप है कि पुलिस-प्रशासन ने उस पर मानसिक दबाव बनाया और नई शिकायत लिखवाकर जिलाध्यक्ष का नाम मामले से बाहर कर दिया।
15 सितंबर को दर्ज हुई थी हल्की धाराओं में FIR
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 15 सितंबर को बांसडीह थाने में आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस केस में बीजेपी कार्यकर्ता आलोक सिंह, अजीत मिश्रा और गणेश गुप्ता को नामजद किया गया था। महिला का कहना है कि इन लोगों ने उसका निजी वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाकर उसकी गरिमा और सामाजिक सम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई। पीड़िता का आरोप है कि आलोक सिंह को सीधे तौर पर जिलाध्यक्ष का संरक्षण हासिल है। दोनों ने मिलकर कई मौकों पर उसका शारीरिक शोषण किया।
'धमकियों से तंग आकर आत्महत्या का आने लगा था ख्याल'
अदालत में दाखिल हलफनामे में महिला ने कहा कि मामला दर्ज कराने के बाद से उसे लगातार डराया-धमकाया जा रहा। मानसिक प्रताड़ना इस कदर बढ़ गई थी कि वह खुदकुशी करने के विचार तक पहुंच गई थी, लेकिन आखिरकार उसने हिम्मत जुटाकर कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
पुलिस का इनकार, जांच जारी रहने का दावा
मामले पर विवाद बढ़ने के बाद बांसडीह के क्षेत्राधिकारी (DSP) जयशंकर मिश्रा ने बताया कि कोर्ट के माध्यम से हलफनामा मिला है। उन्होंने पुलिस पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि शिकायत में फेरबदल नहीं किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही। साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा : जिलाध्यक्ष
बीजेपी जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा ने इन दावों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि महिला पार्टी की जिला कार्यकारिणी की सदस्य है। वह महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष बनने की आकांक्षा रखती थी। संजय मिश्रा का दावा है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा महिला को मोहरा बनाकर उनकी राजनीतिक छवि धूमिल करने की साजिश रची गई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच का स्वागत करते हुए कहा कि वे हर तरह की जांच का सामना करने को तैयार हैं। इस पूरे घटनाक्रम से पार्टी हाईकमान को अवगत करा दिया गया है।