चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच मतभेदों की खबरों के बीच शनिवार को फुल कमीशन की बैठक हुई। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर, नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6, ईसीआईनेट पोर्टल और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया को लेकर कई फैसले लिए गए। आयोग ने कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी मिली है।

नोटिस पाने वाले मतदाताओं के घर जाएंगे BLO

आयोग ने फैसला किया है कि एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं को नाम मैपिंग या अन्य तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस मिला है, उनके घर बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ जाएंगे। बीएलओ संबंधित मतदाताओं से जरूरी दस्तावेज लेकर उन्हें ईसीआईनेट पोर्टल पर अपलोड करेंगे। आयोग के मुताबिक, सामान्य स्थिति में ऐसे मतदाताओं को ईआरओ या एईआरओ कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। विशेष परिस्थिति में ही सुनवाई कराई जाएगी। आयोग ने जिलों को रैन बसेरों, मजदूर बस्तियों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए विशेष शिविर और सहायता केंद्र बनाने के निर्देश भी दिए हैं। इसका उद्देश्य ऐसे पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आसान बनाना है।

Form-6 को लेकर आयोग ने क्या कहा?

नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर चल रहे विवाद के बीच आयोग ने कहा कि एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 के साथ लगाया गया अतिरिक्त घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईआर की अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे। फॉर्म-6 का मुद्दा हाल में इसलिए चर्चा में आया था क्योंकि रिपोर्टों के मुताबिक नए आवेदकों से उनके माता-पिता या दादा-दादी के पिछले एसआईआर रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही थी। चुनाव आयोग ने इसे अलग घोषणा-पत्र बताया है और कहा है कि मूल फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया।

ईसीआईनेट पोर्टल की होगी दोबारा समीक्षा

चुनाव आयोग ने ईसीआईनेट सिस्टम को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। एक समिति इस पूरे सिस्टम की समीक्षा करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पोर्टल का संचालन संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप हो। समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त करेंगे और इसमें आईआईटी या आईआईआईटी के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जा सकता है। आयोग ने कहा कि राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर पिछले कुछ महीनों में पोर्टल में कई बदलाव किए गए हैं। आगे से आईटी मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहलों को आयोग की मंजूरी से पहले अधिकारियों की समिति के स्तर पर चर्चा के लिए रखा जाएगा।

दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी दावे-आपत्तियों की तारीख

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अक्टूबर २०२६ कर दी गई है। इनके निपटारे की समयसीमा अब 30 नवंबर 2026 होगी। वहीं महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।

पहली बार वोट देने वालों के लिए भी मौका

आयोग के मुताबिक बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिन पात्र लोगों का नाम किसी वजह से मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है या जो पहली बार मतदान करने के योग्य हुए हैं, वे संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने राज्यों में विशेष नामांकन अभियान चलाने की बात भी कही है। दिल्ली में नए मतदाताओं के लिए कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में विशेष नामांकन शिविर लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

कांग्रेस ने आयोग के जवाब पर उठाए सवाल

चुनाव आयोग के प्रेस नोट के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि आयोग ने हालिया रिपोर्टों में उठाए गए सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया है। रमेश ने गोवा में मतदाता सूची से हटाए गए 97 लोगों का मामला भी उठाया। उनके मुताबिक, इनमें से 81 लोगों के लिए फॉर्म-6 के जरिए दोबारा नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। कांग्रेस ने सवाल किया कि अगर इन मतदाताओं के नाम पहले हटाए गए थे तो उन्हें हटाने की वजह क्या थी। रमेश ने दिल्ली और महाराष्ट्र में समयसीमा बढ़ाए जाने के फैसले का जिक्र करते हुए कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को लेकर भी सवाल उठाए।

पवन खेड़ा ने Form-6 और ECINET पर मांगा जवाब

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी चुनाव आयोग के प्रेस नोट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर आपत्ति जताई गई थी और अब आयोग की ओर से एसआईआर से बाहर पुराने फॉर्म-6 के इस्तेमाल की बात कही गई है। खेड़ा ने सवाल किया कि अगर जनवरी 2024 के बाद से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी एसएसआर नहीं हुआ है तो पुराने फॉर्म-6 की व्यावहारिक प्रासंगिकता क्या होगी। उन्होंने ईसीआईनेट की प्रस्तावित समीक्षा पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि पहले से मौजूद प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी ने अब तक क्या काम किया और नई समीक्षा व्यवस्था किस तरह अलग होगी।

Gen Z वोटरों को लेकर भी कांग्रेस का सवाल

कांग्रेस ने फॉर्म-6 से जुड़े नए प्रावधान को लेकर पहली बार वोट देने वाले युवाओं की चिंता का मुद्दा भी उठाया है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में जोड़ी गई अतिरिक्त जानकारी से युवा मतदाताओं पर अपने माता-पिता या दादा-दादी के पुराने एसआईआर रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी जुटाने का अतिरिक्त बोझ पड़ा। कांग्रेस इसे लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है। चुनाव आयोग का कहना है कि मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और एसआईआर के दौरान अतिरिक्त घोषणा-पत्र की व्यवस्था अलग से लागू की गई है।

योगेंद्र यादव ने भी प्रेस नोट पर सवाल उठाए

चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज पर राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी खबरों और शनिवार के प्रेस नोट पर सवाल उठाए। यादव ने अपने बयान में चुनाव आयुक्तों के बीच विवाद को लेकर तीखी टिप्पणी की और तीनों आयुक्तों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग की। यह उनकी राजनीतिक टिप्पणी और मूल्यांकन है, न कि चुनाव आयोग की ओर से स्वीकार किया गया निष्कर्ष।

बैठक के एजेंडे और मिनट्स को लेकर भी फैसला

चुनाव आयोग ने आगे से बैठकों का एजेंडा पहले भेजने और बैठक की कार्यवाही यानी मिनट्स जारी करने का फैसला किया है। आयोग के सभी अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट तय समयसीमा के भीतर, यानी हर साल 31 दिसंबर तक पूरी करने की बात कही गई है। आयोग ने यह भी कहा कि 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर से जुड़ा आदेश जारी किया गया था और इसे पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी। आयोग ने अपने हालिया बयान में सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के आदेश का भी हवाला दिया है।