वस्तु एवं सेवा कर यानी GST व्यवस्था में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार GST कानून के तहत टैक्स अधिकारियों को मिली गिरफ्तारी की शक्ति हटाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस मुद्दे पर 7 अक्टूबर को होने वाली GST Council की बैठक में चर्चा प्रस्तावित है। अगर परिषद की मंजूरी मिलती है तो केंद्र सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में कानून में संशोधन ला सकती है। सरकार का उद्देश्य कारोबारियों में टैक्स अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर बनी आशंकाओं को दूर करना और कारोबारी माहौल को अधिक सहज बनाना बताया जा रहा है।

नौ साल बाद GST व्यवस्था में बदलाव की तैयारी

GST जुलाई 2017 में लागू हुआ था। इसके बाद से कुछ गंभीर टैक्स अपराधों के मामलों में गिरफ्तारी का प्रावधान मौजूद रहा है। अब केंद्र और राज्यों के बीच इस व्यवस्था में बदलाव को लेकर पिछले कई महीनों से चर्चा चल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबारी संगठनों की ओर से गिरफ्तारी की शक्ति के इस्तेमाल को लेकर लगातार चिंता जताई गई है। सरकार अब ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के बजाय आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई का विकल्प तलाश रही है।

गंभीर धोखाधड़ी पर कार्रवाई जारी रहेगी

गिरफ्तारी की शक्ति हटाने का मतलब यह नहीं होगा कि जानबूझकर टैक्स चोरी या धोखाधड़ी करने वालों पर कार्रवाई बंद हो जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार गंभीर और जानबूझकर किए गए अपराधों में अभियोजन जारी रह सकता है और जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी भारतीय न्याय संहिता के तहत की जा सकती है। मौजूदा CGST Act की धारा 69 के तहत कुछ निर्धारित अपराधों में आयुक्त को गिरफ्तारी की अनुमति देने का अधिकार है। इसके लिए आयुक्त के पास संबंधित व्यक्ति के अपराध में शामिल होने के बारे में ठोस आधार पर विश्वास होने की आवश्यकता होती है। इन मामलों में फर्जी चालान, बिना वास्तविक आपूर्ति के इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करना और टैक्स से जुड़े गंभीर अपराध शामिल हैं।

कितनी गिरफ्तारियां हुईं?

आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच केंद्रीय GST अधिकारियों ने अपराध से जुड़े 72,393 मामलों में 887 गिरफ्तारियां कीं। इसमें राज्य GST अधिकारियों की ओर से की गई गिरफ्तारियां शामिल नहीं हैं।

कारोबारियों को क्या फायदा होगा?

सरकार की योजना सफल होने पर टैक्स विवादों के मामलों में सीधे गिरफ्तारी की आशंका कम हो सकती है। उद्योग जगत लंबे समय से यह शिकायत करता रहा है कि गिरफ्तारी का प्रावधान कुछ मामलों में दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार के स्तर पर प्रस्ताव को टैक्सपेयर्स के लिए अधिक अनुकूल कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि अंतिम व्यवस्था GST Council की चर्चा और उसके बाद होने वाले विधायी बदलावों पर निर्भर करेगी।

7 अक्टूबर की बैठक पर नजर

GST लागू होने से पहले ही इस प्रावधान को लेकर राज्यों में मतभेद सामने आए थे। दिसंबर 2016 में GST Council की बैठक के दौरान महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने कारोबार सुगमता के लिहाज से टैक्स अधिकारियों को गिरफ्तारी की शक्ति देने पर सवाल उठाए थे। परिषद के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस विषय पर लंबी चर्चा दर्ज है। अब इस प्रस्ताव पर GST Council की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक में चर्चा होगी। अगर परिषद से सहमति बनती है तो सरकार आगे कानूनी संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। यानी फिलहाल गिरफ्तारी की शक्ति खत्म नहीं हुई है, बल्कि उसे हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।