फरीदाबाद के सीही गांव में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। खेलते समय तीन साल की बच्ची खुले बोरवेल में जा गिरी। बच्ची को बाहर निकालने के लिए करीब 10 घंटे तक लगातार बचाव अभियान चलाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। रेस्क्यू टीमों ने सोमवार तड़के करीब 3:50 बजे बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला। इसके तुरंत बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
खेलते समय बोरवेल में गिरी बच्ची
जानकारी के मुताबिक बच्ची अन्य बच्चों के साथ बोरवेल के आसपास खेल रही थी। इसी दौरान वह वहां खड़े एक वाहन पर चढ़ी और फिसलकर खुले बोरवेल में गिर गई। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत परिवार और पुलिस को इसकी सूचना दी। बोरवेल काफी पुराना बताया जा रहा है और करीब 10 साल से इस्तेमाल में नहीं था। बताया गया कि इसके ऊपर पहले ढक्कन लगा हुआ था, लेकिन हादसे से कुछ दिन पहले वह ढक्कन वहां से हट गया था।
रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। बच्ची को बचाने के लिए बोरवेल के आसपास खुदाई शुरू की गई और उसके अंदर लगातार ऑक्सीजन पहुंचाई गई। बाद में NDRF और SDRF की टीमें भी अभियान में शामिल हुईं। नगर निगम, पुलिस, फायर सर्विस और मेडिकल टीमों ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोग किया। अंधेरा होने के कारण मौके पर रोशनी की व्यवस्था की गई और बच्ची की स्थिति का पता लगाने के लिए कैमरे का इस्तेमाल भी किया गया।
तड़के बाहर निकाला, लेकिन नहीं बची जान
कई घंटे की मशक्कत के बाद बचाव दल बच्ची तक पहुंचने में सफल हुआ। सोमवार सुबह करीब 3:50 बजे उसे बोरवेल से बाहर निकाला गया। मौके पर पहले से एंबुलेंस और मेडिकल टीम को तैयार रखा गया था, जिसके बाद बच्ची को तुरंत अस्पताल भेजा गया। हालांकि अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। करीब 10 घंटे तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन का अंत बेहद दुखद रहा।
पुराने बोरवेल की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना के बाद इलाके में खुले और इस्तेमाल में नहीं आने वाले बोरवेल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस बोरवेल में बच्ची गिरी, वह नगर निगम का था और लंबे समय से बंद पड़ा था। ढक्कन हटने के बाद उसे दोबारा सुरक्षित तरीके से बंद नहीं किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में यह हादसा केवल एक परिवार के लिए त्रासदी नहीं, बल्कि खुले पड़े पुराने बोरवेल की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।