UP Rajyasabha BJP Candidate News : उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आज अपने सभी आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने बड़ा बदलाव करते हुए अपने सभी पुराने चेहरों को बदल दिया और आठ नए प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इस सूची में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा के नाम शामिल नहीं हैं। इससे संकेत मिल रहे कि मोदी मंत्रिमंडल में जल्द बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। बता दें, उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 31 सीटें हैं। इनमें से 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान होना है। 6 अक्टूबर नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि है। कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरता है तो भाजपा के 8 और समाजवादी पार्टी (SP) के 2 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है।

सामाजिक समीकरण: पिछड़ा वर्ग पर फोकस और असंतोष दूर करने की कोशिश

पिछड़ा वर्ग : पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने के लिए लोधी (धर्मपाल सिंह), पाल (प्रकाश पाल) और कुर्मी (श्रुति गंगवार) समाज से एक-एक उम्मीदवार बनाया गया है।

दलित वर्ग : पासी समाज (प्रियंका सिंह रावत) और खटीक समाज (विद्या सागर सोनकर) को मौका दिया गया है।

ब्राह्मण वर्ग : यूजीसी के नए नियमों और सवर्ण वर्ग की संभावित नाराजगी को ध्यान में रखते हुए राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय को उम्मीदवार बनाया गया है।

क्षत्रिय वर्ग : राम प्रताप सिंह चौहान को प्रत्याशी बनाकर क्षत्रिय समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

बीजेपी उम्मीदवारों की संक्षिप्त प्रोफाइल

धर्मपाल सिंह : बरेली की आंवला सीट से विधायक और योगी सरकार में पशुधन मंत्री। आरएसएस के पुराने कैडर और लोधी समाज के बड़े नेता।

राधाकांत ओझा : प्रयागराज के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विधि स्नातक।

प्रकाश पाल : बीजेपी पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश प्रमुख, पूर्व आरएसएस प्रचारक और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के अनुभवी संगठनकर्ता।

विद्या सागर सोनकर : पूर्व लोकसभा सांसद और बीजेपी प्रदेश महामंत्री। जौनपुर से ताल्लुक रखते हैं और 1985 से पार्टी से जुड़े हैं।

गोपी कृष्ण पांडेय : यूपी पशुधन विकास परिषद के अध्यक्ष और पूर्व एबीवीपी कार्यकर्ता। चुनाव प्रबंधन में माहिर माने जाते हैं।

प्रियंका सिंह रावत : बाराबंकी से पूर्व लोकसभा सांसद और वर्तमान में बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष। पूर्व में पत्रकारिता से भी जुड़ी रही हैं।

राम प्रताप सिंह चौहान : आगरा निवासी और बीजेपी के प्रदेश महामंत्री। 1990 के दशक से युवा मोर्चा से राजनीति की शुरुआत की।

श्रुति गंगवार : झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी और पेशे से वकील। बरेली क्षेत्र से कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल पर असर और बाराबंकी का बढ़ता कद

हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। उत्तराखंड या पश्चिम बंगाल से भी उन्हें मौका न मिलने के कारण अब संसद पहुंचने का रास्ता फिलहाल बंद नजर आ रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत कोई भी व्यक्ति बिना सांसद बने केवल 6 महीने तक ही केंद्रीय मंत्री पद पर रह सकता है। पीयूष गोयल को पहले ही पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया जा चुका है। इससे केंद्र सरकार में बदलाव तय दिख रहे हैं। दूसरी ओर इस फैसले से अवध क्षेत्र के छोटे से जिले बाराबंकी का राजनीतिक कद काफी बढ़ गया है। प्रदेश महामंत्री उपेंद्र रावत, एससी आयोग के अध्यक्ष बैद्यनाथ रावत, राज्यमंत्री सतीश शर्मा और अब राज्यसभा प्रत्याशी प्रियंका सिंह रावत के रूप में जिले को भारी सांगठनिक तवज्जो मिली है।

क्या बन सकते हैं समीकरण?

यूपी विधानसभा की 403 सीटों में से वर्तमान में 7 सीटें रिक्त हैं। यानी 396 विधायक मतदान प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

जीत का फॉर्मूला : एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के न्यूनतम 37 वोटों की आवश्यकता होगी।

सपा का गणित : समाजवादी पार्टी के पास 100 विधायक हैं। इनमें से एक विधायक जेल में होने के कारण प्रभावी संख्या 99 रह जाती है। ऐसे में सपा अपने 2 प्रत्याशियों (प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस ग्रुप के प्रेसिडेंट धनराज परिमल नाथवानी) को आसानी से जिता सकती है।

अगर उतरा अतिरिक्त प्रत्याशी : सपा तीसरे प्रत्याशी को मैदान में उतारती है तो चुनाव की नौबत आएगी। सपा को तीसरे उम्मीदवार के लिए 12 अतिरिक्त वोटों और भाजपा को अपने 8वें उम्मीदवार के लिए 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। इससे क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ सकती है।

चुनाव का अधिकृत कार्यक्रम

नामांकन की आखिरी तारीख : 6 अक्टूबर

नाम वापसी की अंतिम तिथि : 9 अक्टूबर

मतदान और मतगणना : 16 अक्टूबर (शाम 5 बजे के बाद नतीजे)