मुरादाबाद, 22 मई। उत्तर प्रदेश के कॉलेजों में ड्रेस कोड को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर अपनी असहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ड्रेस कोड के बहाने किसी की धार्मिक पहचान और परंपराओं में दखल नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आज के युवा इस ड्रेस कोड को पसंद नहीं करते हैं।
एसटी हसन ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि स्कूल स्तर पर ड्रेस कोड लागू करना संभव हो सकता है, लेकिन ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, एमफिल और पीएचडी के छात्रों पर इसे लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि युवा पीढ़ी ड्रेस कोड को नकारती है, जो कि एक वास्तविकता है।
सपा नेता ने स्पष्ट किया कि यदि ड्रेस कोड लागू किया जाता है, तो उसमें केवल सामान्य कपड़े जैसे पैंट-शर्ट या सलवार-कुर्ता शामिल होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी के पगड़ी पहनने, हिजाब लगाने या टोपी पहनने पर कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए। आगे उन्होंने यह भी कहा कि सिखों की पगड़ी और मुस्लिम लड़कियों के हिजाब जैसी धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
राज्य के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में ड्रेस कोड अनिवार्य करने की योजना बनाई गई है। इस फैसले के लागू होने के बाद केवल यूनिफॉर्म पहनकर आने वाले छात्रों को ही कॉलेज में प्रवेश मिलेगा। यह कदम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देशों के तहत लिया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य अमीरी-गरीबी के भेदभाव को समाप्त करना और अध्ययन के लिए बेहतर माहौल बनाना है। साथ ही, इससे छात्रों में अनुशासन भी देखने को मिलेगा।
सरकार के इस निर्णय के बाद कैम्पस में जींस, टी-शर्ट और शॉर्ट्स जैसे अनौपचारिक कपड़ों पर रोक लगाई जाएगी। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।