नई दिल्ली, 23 मई। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने शिक्षा मंत्रालय के विरुद्ध एक रिट याचिका प्रस्तुत की है। यह याचिका शिक्षा संस्थानों, दाखिलों, परीक्षाओं, मान्यता, संबद्धता और प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर आधारित है। इसे 'यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट बनाम शिक्षा मंत्रालय' नाम से दर्ज किया गया है।
जानकारी के अनुसार, यह याचिका सबसे पहले 15 मई को डायरी संख्या 30471/2026 के तहत दाखिल की गई थी। इसके बाद इसे 20 मई को औपचारिक रूप से पंजीकृत किया गया और 22 मई को सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण हुई। फिलहाल मामला न्यायालय में लंबित है और इसे “मोशन हियरिंग – फ्रेश फॉर एडमिशन – सिविल केस” श्रेणी में शामिल किया गया है।
इस मामले में शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और सीबीआई को भी प्रतिवादी बनाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले की सुनवाई संभावित रूप से 25 मई को हो सकती है, परंतु अंतिम तिथि न्यायालय की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
यूडीएफ का कहना है कि यह याचिका मेडिकल छात्रों, डॉक्टरों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के हित में दाखिल की गई है। संगठन का मानना है कि मेडिकल शिक्षा और परीक्षाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
यूडीएफ के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल ने कहा कि संगठन डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की समस्याओं को कानूनी और संवैधानिक तरीके से उठाने में वचनबद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि यूडीएफ भविष्य में भी मेडिकल समुदाय के हितों की रक्षा के लिए कार्य करता रहेगा और न्याय तथा संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
संगठन ने यह भी बताया कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूर्ण विश्वास है और वे मामले से संबंधित सभी आवश्यक तथ्य अदालत में पेश करेंगे। वर्तमान में मेडिकल समुदाय की नजरें इस मामले की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।