कोलकाता, 22 मई। कुर्बानी के संदर्भ में उच्च न्यायालय पहुंचे याचिकाकर्ता अख्रुज्जमान ने बातचीत में कहा कि साल में एक बार कुर्बानी का त्योहार हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हम घर में जानवरों को पालते हैं और उनकी कुर्बानी करते हैं। लेकिन बंगाल सरकार ने एक नोटिस जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि 1950 के अधिनियम और उच्च न्यायालय के निर्णय का पालन करना अनिवार्य होगा। अख्रुज्जमान ने बताया कि 14 वर्ष से अधिक उम्र के जानवरों की मेडिकल जांच कराकर सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही वे कुर्बानी कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि 13 मई को जारी नोटिस के बाद, हमने बंगाल सरकार को एक पत्र भेजा जिसमें उल्लेख किया गया कि 1950 के अधिनियम की धारा 12 के तहत धार्मिक कारणों से सरकार छूट प्रदान कर सकती है।
अख्रुज्जमान ने कहा कि जब सरकार ने हमारे पत्र का जवाब नहीं दिया, तब हमने उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में याचिका दायर की और कुर्बानी की अनुमति की मांग की।
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कुर्बानी के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्णय पर बात करते हुए कहा कि हर किसी को अपने धर्म का पालन करने का पूरा अधिकार है, जो कि देश के संविधान द्वारा मान्य है।
कुणाल घोष ने भाजपा की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने कुर्बानी को लेकर कुछ निर्देश जारी किए हैं, लेकिन यही चीजें निर्यात भी की जा रही हैं। केंद्र सरकार विदेशी मुद्रा कमाने के लिए इनका निर्यात कर रही है, जबकि बंगाल में इसे रोकने की कोशिश की जा रही है, जबकि दिल्ली से इसका निर्यात हो रहा है।
उन्होंने बताया कि अख्रुज्जमान ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 का उल्लेख करते हुए कुणाल घोष ने कहा कि राज्य सरकार इसमें कुछ छूट दे सकती है। हमने छूट की मांग की है, कानून को चुनौती नहीं दी है।