मुंबई, 22 मई। भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में वसुंधरा कोमकली, जिन्हें आमतौर पर 'वसुंधरा ताई' के नाम से जाना जाता है, का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। उन्होंने अपने सुरों और गहरी समझ के जरिए हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को नई पहचान दिलाई। उनके जीवन का एक रोचक तथ्य यह है कि केवल 12 वर्ष की आयु में उनकी मुलाकात मशहूर गायक कुमार गंधर्व से हुई थी, जिसने उनके संगीत के प्रति दृष्टिकोण को बदल दिया।
वसुंधरा का जन्म 23 मई 1931 को झारखंड के जमशेदपुर में हुआ था। उनके परिवार का माहौल संगीत में डूबा हुआ था, जिससे उन्होंने जल्दी ही संगीत की ओर रुझान किया।
कहा जाता है कि जब वसुंधरा 12 साल की थीं, तब उन्होंने कोलकाता में एक संगीत समारोह में कुमार गंधर्व को पहली बार देखा। उनकी आवाज ने वसुंधरा पर गहरा प्रभाव डाला, और उन्होंने उनसे शास्त्रीय संगीत सीखने की इच्छा व्यक्त की। हालांकि, कुमार गंधर्व ने उन्हें मुंबई आने की सलाह दी, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के चलते वह वहां नहीं जा पाईं।
वसुंधरा ने कोलकाता में रहकर संगीत की शिक्षा जारी रखी और जल्द ही ऑल इंडिया रेडियो के कोलकाता केंद्र पर गाना शुरू कर दिया। उनके सुरों की मिठास और गहरी समझ ने उन्हें जल्दी ही प्रसिद्धि दिलाई।
युद्ध के बाद, 1946 में वसुंधरा मुंबई गईं, जहां उन्होंने प्रसिद्ध संगीतज्ञ प्रोफेसर बी.आर. देवधर से शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने फिर से कुमार गंधर्व से संगीत की बारीकियां सीखना शुरू किया और कुछ समय बाद दोनों ने विवाह कर लिया। इस शादी के बाद वसुंधरा देवास में बस गईं और वहीं से उनके संगीत करियर का नया अध्याय प्रारंभ हुआ।
कोमकली ने कई वर्षों तक कुमार गंधर्व के साथ मंच साझा किया, जहां वह अक्सर पीछे बैठकर तानपुरा संभालती थीं। धीरे-धीरे वह एक प्रमुख शास्त्रीय गायिका बन गईं। उन्होंने खयाल गायकी के अलावा भजन, लोकगीत और पारंपरिक रचनाएं भी प्रस्तुत कीं।
भारत सरकार ने 2006 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है, और साथ ही उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई अन्य सम्मान भी प्राप्त हुए।
वसुंधरा की बेटी कलापिनी कोमकली भी एक प्रमुख शास्त्रीय गायिका हैं, और उनका पोता भुवनेश कोमकली भी संगीत के क्षेत्र में सक्रिय है।
29 जुलाई 2015 को वसुंधरा कोमकली का निधन मध्य प्रदेश के देवास में दिल के दौरे से हुआ। उन्होंने 84 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली।