मुंबई, 24 मई। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने बांद्रा (पूर्व) स्थित गरीब नगर में चल रहे ध्वस्तीकरण कार्य का निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों से बातचीत की। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाइयों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां के निवासियों ने कई वर्षों से इस स्थान पर निवास किया था और अब उनके घरों पर बुलडोजर चला दिया गया है। वारिस पठान ने उल्लेख किया, "लगभग 400 गरीब परिवारों के आशियाने गिराए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर हैं। प्रभावित लोग पानी, शौचालय और अन्य प्राथमिक सुविधाओं की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं।
पठान ने बताया कि कई परिवारों ने उन्हें बिजली के बिल, घर के दस्तावेज और अन्य प्रमाण दिखाए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे लंबे समय से इस स्थान पर निवास कर रहे थे। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध किया कि जिनके दस्तावेज सही हैं, उन्हें जल्द से जल्द वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए, खासकर मानसून के मद्देनजर।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि जिन अधिकारियों ने इन लोगों को लंबे समय तक वहां रहने की अनुमति दी, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। पठान ने कहा कि सिर्फ गरीबों के घरों को ध्वस्त करना सही नहीं है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराना चाहिए।
इस दौरान वारिस पठान ने देवनार बकरी मंडी का भी दौरा किया। वहाँ उन्होंने व्यापारियों, नगर निगम के अधिकारियों और पुलिस के साथ व्यवस्थाएं देखी।
पठान ने कहा कि दूर-दराज से बकरियां लेकर आने वाले व्यापारियों को पानी और अन्य सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने मंडी के संचालन की अनुमति जरूर दी है, लेकिन आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई है।
उन्होंने बताया कि एआईएमआईएम की टीम और स्थानीय पार्षद इस समस्या को राज्य सरकार के समक्ष उठाएंगे और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान व्यापारियों और मवेशियों के लिए उचित व्यवस्था एक सरकारी जिम्मेदारी है।
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के संबंध में वारिस पठान ने कहा कि मुसलमान कानून व संविधान का सम्मान करते हैं और उसी के दायरे में कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहती है तो ऐसा करने वाली कोई बात नहीं है। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर राजनीति के बजाय सभी को संविधान के तहत समाधान निकालने की आवश्यकता है।