गांधीनगर, 25 मई। वडोदरा में जून के अंतिम सप्ताह में होने वाले सेंट्रल गुजरात की वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) का उद्देश्य औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना और क्षेत्र की समृद्ध हस्तशिल्प एवं सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करना है। इस सम्मेलन में संभावना है कि सेंट्रल गुजरात के उन हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा, जिन्हें भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल चुका है या जो जीआई टैग के लिए आवेदन कर चुके हैं।
जीआई टैग किसी उत्पाद की विशेष पहचान, गुणवत्ता और उसके भौगोलिक स्थान से जुड़ी ख़ासियत को मान्यता देता है। सेंट्रल गुजरात की सांस्कृतिक विरासत में अहमदाबाद सोदागरी ब्लॉक प्रिंट, माता नी पछेड़ी, पिथोरा पेंटिंग, पेथापुर प्रिंटिंग ब्लॉक्स, अगेट्स ऑफ कैम्बे और सांखेड़ा फर्नीचर जैसे अनेक जीआई टैग प्राप्त उत्पाद शामिल हैं।
अहमदाबाद के जामालपुर क्षेत्र में कारीगरों द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित हस्त-मुद्रित वस्त्र कला 'सोदागरी ब्लॉक प्रिंट' को 2024 में जीआई टैग मिला। यह परंपरागत कला मुख्य रूप से छीपा समुदाय द्वारा निभाई जाती है। अहमदाबाद और खेड़ा जिलों की पारंपरिक वस्त्र कला 'माता नी पछेड़ी' को 2023 में जीआई टैग प्राप्त हुआ, जिसमें देवी-देवताओं के चित्र कपड़े पर उकेरे जाते हैं।
राठवा, भील और भिलाला जनजातियों की अनुष्ठानिक भित्ति कला 'पिथोरा पेंटिंग' अपने जीवंत रंगों और अद्वितीय शैली के लिए प्रसिद्ध है, और इसे 2021 में जीआई टैग मिला। यह मुख्यतः छोटाउदेपुर और पंचमहल जिलों में प्रचलित है। गांधीनगर जिले के पेथापुर गांव में पिछले लगभग 300 वर्षों से चल रही 'पेथापुर प्रिंटिंग ब्लॉक्स' की कला को 2018 में उसकी विशिष्ट हस्त-नक्काशी तकनीक के लिए जीआई टैग मिला।
आणंद जिले के खंभात (पूर्व में कैम्बे) में निर्मित 'अगेट्स ऑफ कैम्बे' को 2008 में जीआई टैग मिला है, जिसका संबंध हड़प्पा सभ्यता से जोड़ा गया है। वडोदरा जिले में सांखेड़ा कस्बे के खारड़ी-सुथार समुदाय द्वारा निर्मित 'सांखेड़ा फर्नीचर' को भी 2008 में जीआई टैग प्राप्त हुआ, जिसमें सागौन की लकड़ी से बने फर्नीचर को पारंपरिक रूप से मैरून और सुनहरे रंगों से सजाया जाता है। इसके अलावा, दाहोद बीड वर्क और खंभात काइट जैसे उत्पाद भी हैं जो जीआई टैग के लिए आवेदन कर चुके हैं, और उन्हें वीजीआरसी में प्रदर्शित किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047 विजन' के अनुसार इन पारंपरिक उत्पादों को 'वोकल फॉर लोकल' अभियान के जरिए समर्थन मिल रहा है। वडोदरा में होने वाली वीजीआरसी केंद्रीय गुजरात के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करते हुए पारंपरिक कारीगरों और उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। पिछले संस्करणों ने क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रभावी मंच के रूप में कार्य किया है।
इन रीजनल कॉन्फ्रेंस में एमओयू का आदान-प्रदान, वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम्स, रिवर्स बायर-सेलर मीट, व्यापार प्रदर्शनियां और विशेष सेक्टर पवेलियन आयोजित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त औद्योगिक परियोजनाओं का उद्घाटन, एमएसएमई को क्षेत्रीय पुरस्कार, विशेष बी2बी और बी2जी नेटवर्किंग सत्र, उद्यमी मेले, औद्योगिक एवं पर्यटन स्थलों का भ्रमण और वैश्विक प्रवासी समुदाय के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारी समझौतों पर भी जोर दिया जाता है।
स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक निवेशकों से जोड़ते हुए और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं नवाचार को प्रदर्शित करते हुए आगामी वीजीआरसी, सेंट्रल गुजरात की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश करने में एक प्रभावी साधन सिद्ध होगी।