उत्तर प्रदेश: विश्वविद्यालयों में यूनिफॉर्म कोड लागू, छात्रों और शिक्षकों ने स्वागत किया

उत्तर प्रदेश: विश्वविद्यालयों में यूनिफॉर्म कोड लागू, छात्रों और शिक्षकों ने स्वागत किया

नई दिल्ली, 23 मई। उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ड्रेस कोड को लागू करने के राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश के बाद शिक्षा क्षेत्र में उत्साहजनक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। शिक्षकों, छात्रों और जनप्रतिनिधियों ने इसे अनुशासन, समानता और बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए एक महत्वपूर्ण कदम कहा है।

मुजफ्फरनगर के शिव हर्ष किसान पीजी कॉलेज की प्राचार्य रीना पाठक ने इस निर्णय की प्रशंसा करते हुए कहा कि कॉलेज स्तर पर पहले से ही ड्रेस कोड लागू है और कई छात्र भी यूनिफॉर्म में कॉलेज आ रहे हैं। उनका कहना था कि इससे छात्रावास में अनुशासन बढ़ता है और शिक्षा का माहौल अधिक व्यवस्थित होता है। यह कदम निश्चित रूप से सराहनीय है और इससे छात्रों में सकारात्मक सोच उत्पन्न होगी।

एक मुजफ्फरनगर छात्र ने ड्रेस कोड के बारे में अपनी राय साझा करते हुए कहा कि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया गया है। छात्र का मानना है कि यूनिफॉर्म से कॉलेज में अनुशासन में सुधार आएगा और सभी छात्रों में समानता का भाव बनेगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि कोई छात्र पहनावे के आधार पर खुद को अलग या कमतर महसूस न करे।

हरदोई की रजनी तिवारी ने भी इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में पहले से यूनिफॉर्म व्यवस्था मौजूद है और अब इसे विश्वविद्यालयों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने इसे एक सकारात्मक और सराहनीय कदम बताया, जिससे विद्यार्थियों में अनुशासन और एकरूपता आएगी। इस निर्णय से शिक्षा संस्थानों की पहचान भी मजबूत होगी।

गाजीपुर पीजी कॉलेज के प्राचार्य राघवेंद्र पांडे ने बताया कि ड्रेस कोड लागू होने से छात्रों और संस्थानों को लाभ मिलेगा। यूनिफॉर्म के माध्यम से यह आसानी से पहचाना जा सकेगा कि कौन छात्र किस महाविद्यालय या विश्वविद्यालय से संबंधित है। उन्होंने यह भी कहा कि यह उन छात्रों के लिए राहत की बात है जो रोज नए कपड़े खरीदने में सक्षम नहीं होते। यूनिफॉर्म से आर्थिक और सामाजिक भेदभाव की भावना भी कम होगी।

छात्रों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यूनिफॉर्म लागू होने से रोज नए कपड़े पहनने की चिंता दूर होगी और सभी विद्यार्थियों की समान पहचान बनेगी। विद्यार्थियों का मानना है कि यह निर्णय शिक्षा संस्थानों में बेहतर माहौल बनाने में मदद करेगा।