उत्तर प्रदेश को बनाएंगे अंतरराष्ट्रीय वेलनेस डेस्टिनेशन: सीएम योगी

उत्तर प्रदेश को बनाएंगे अंतरराष्ट्रीय वेलनेस डेस्टिनेशन: सीएम योगी

लखनऊ, 24 मई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में ‘आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति-2026’ को लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य को केवल चिकित्सा सेवाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि आयुष, योग, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस सेवाओं के समेकन से इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुष सेवाओं को आधुनिक प्रबंधन, गुणवत्ता मानकों और पर्यटन से जोड़कर एक ऐसा मॉडल तैयार किया जाना चाहिए जो स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ रोजगार और निवेश को भी बढ़ावा दे।

सीएम योगी ने आगे कहा कि प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर, आयुर्वेद एवं योग की परंपरा और धार्मिक पर्यटन सर्किट को आयुष वेलनेस क्षेत्र से जोड़ा जा सकता है। वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के आस-पास वेलनेस और उपचार पर आधारित पर्यटन को विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने निर्देश दिया कि आयुष संस्थानों को इलाज के केंद्रों के साथ-साथ वेलनेस, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र बनाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि राज्य में वर्तमान में 3,953 आयुष स्वास्थ्य इकाइयां, 1,034 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 225 योग वेलनेस सेंटर और 19 आयुष चिकित्सा महाविद्यालय कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष सेवाओं का विस्तार गुणवत्तापूर्ण और मानकीकृत रूप में किया जाए। इसके लिए पीपीपी मॉडल के जरिए आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा और प्रशिक्षण केंद्र तथा आयुष कॉलेजों के उन्नयन की दिशा में योजनाबद्ध क्रियाकलाप किए जाने चाहिए।

बैठक में नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस नीति के अंतर्गत एकीकृत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आयुष वेलनेस और चिकित्सा केंद्र, प्रशिक्षण आधारित संस्थान और आयुष कॉलेजों के मॉडल विकसित करने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों में पंचकर्म, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं और अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियां भी शामिल की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष आधारित वेलनेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की सक्रियता जरूरी है। उन्होंने निवेशकों को एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से त्वरित अनुमोदन उपलब्ध कराने और परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने का निर्देश दिया। बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित नीति में निवेश आधारित सब्सिडी, संचालन संबंधी प्रोत्साहन, ब्याज सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट और रोजगार सृजन पर आधारित प्रोत्साहन का प्रावधान है। आयुष शोध, नवाचार और पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए भी विशेष प्रोत्साहन देने की बात की गई।

सीएम योगी ने मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडलों में एकीकृत आयुष महाविद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को आधुनिक आयुष चिकित्सा, प्रशिक्षण और शोध के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

उन्होंने विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए आयुष चिकित्सा संस्थानों में ओपीडी सेवाओं में सुधार, दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और पंचकर्म जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयुष सेवाओं को जनविश्वास और गुणवत्ता से जोड़कर मरीजों को बेहतर उपचार और वेलनेस सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर में शोध एवं नवाचार गतिविधियों को गति देने पर जोर दिया।

उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थायी फैकल्टी की नियुक्ति की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने और आयुष की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।