Ukraine Russia War Robot Soldiers : रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध अब नए और आधुनिक दौर में पहुंच चुका है। युद्ध के मैदान में इंसानी सैनिकों की जगह अब आधुनिक रोबोट और मानवरहित वाहन मोर्चा संभालते दिख रहे हैं। यूक्रेन ने पहली बार बड़े स्तर पर विस्फोटकों से लैस सुसाइड जमीनी रोबोट का इस्तेमाल कर रूसी सेना के ठिकानों पर विनाशकारी हमले करने का दावा किया है। यूक्रेन की सेना के थर्ड आर्मी कॉर्प्स के मुताबिक ऑपरेशन विवाल्डी नामक इस विशेष अभियान के तहत रोबोट और ड्रोन तकनीक के संयुक्त प्रयोग से 3 हजार रूसी सैनिकों को मार गिराया गया है। साथ ही पूर्वी यूक्रेन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डोनेट्स्क इलाके के 5 गांवों और 3 अन्य बस्तियों पर फिर से कब्जा कर लिया गया है।

मई में शुरू की थी कार्रवाई, इस महीने हुआ समाप्त

सैन्य सूत्रों के मुताबिक यह गुप्त अभियान इस वर्ष मई में शुरू हुआ था और सितंबर के अंतिम सप्ताह में सफलतापूर्वक समाप्त हुआ। इस दौरान इन आत्मघाती रोबोटों ने कुल मिलाकर 15700 से अधिक जोखिम भरे अभियानों को अंजाम दिया। इन रोबोटों की खासियत है कि विशालकाय ड्रोन इन्हें हवा में उठाकर रूसी सीमा के 14.5 किलोमीटर अंदर तक ले जाते और सुरक्षित तरीके से जमीन पर छोड़ देते हैं। इसके बाद ये जमीनी रोबोट अपने आंतरिक पहियों के सहारे चलते हुए दुश्मन के ठिकानों तक पहुंचते और खुद को विस्फोट से उड़ा देते हैं। 

राबोटो में लगे होते हैं कैमरे

रोबोटों में उच्च क्षमता वाले कैमरे लगे हैं, जिनसे दूर बैठा ऑपरेटर पूरे इलाके का जायजा लेता है। इस तकनीक का उपयोग रूसी सेना के कमांड सेंटर, हथियारों के डिपो, रसद भंडारों और नदी पार करने के मार्गों को निशाना बनाने के लिए किया गया। इस पूरी रणनीति का मुख्य उद्देश्य अपने सैनिकों की जान को खतरे में डाले बिना दुश्मन को अधिक-से-अधिक क्षति पहुंचाना था। थर्ड आर्मी कॉर्प्स के कमांडर जनरल आंद्री बिलेत्स्की ने इसे वैश्विक युद्ध इतिहास में रोबोटिक्स का पहला ऐसा सफल प्रयोग बताया है।

कैसे काम करते हैं ये सुसाइड रोबोट?

यह सुसाइड जमीनी रोबोट वास्तव में छोटे मानवरहित वाहन होते हैं, जो अत्यंत कठिन रास्तों पर चलने में सक्षम हैं। इनमें भारी मात्रा में बारूद और विस्फोटक सामग्री भरी होती है। एक सुरक्षित स्थान पर बैठा सैन्य ऑपरेटर रिमोट कंट्रोल और लाइव वीडियो फीड के जरिए इन्हें नियंत्रित करता है। रोबोट के मोर्चे पर जाने से इंसानी सैनिकों को बारूदी सुरंगों और सीधी गोलीबारी के जोखिम से सुरक्षा मिलती है। वैसे, ये रोबोट पूरी तरह से स्वायत्त नहीं हैं और हमला करने का अंतिम फैसला मानव ऑपरेटर ही लेता है।

यूक्रेन का भविष्य का प्लान: आर्मी ऑफ रोबोट्स

युद्ध में सैनिकों की जान बचाने के मकसद से यूक्रेन अब रोबोट की पूरी सेना तैयार करने में जुटा है। पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने आर्मी ऑफ रोबोट्स योजना का खाका प्रस्तुत किया है। इसके अंतर्गत इंसान जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट्स विकसित किए जा रहे, जो भारी मशीन गन में गोलियां लोड करने, बैटरी बदलने और युद्ध क्षेत्र में सेंसर लगाने जैसे जोखिम भरे काम निपटाएंगे।

वैश्विक स्तर पर रोबोटिक तकनीक की होड़

वर्तमान में यूक्रेन ही नहीं, बल्कि रूस-चीन, इजराइल और भारत जैसे देश भी सैन्य रोबोटिक्स पर तेजी से काम कर रहे। रूस इन वाहनों का प्रयोग सामान पहुंचाने में कर रहा, जबकि चीन हथियारबंद रोबोट विकसित कर रहा। भारत में भी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रोबोट तैयार कर रहा। भारत द्वारा निर्मित एक्सप्लोडर नामक वाहन विषम परिस्थितियों में निगरानी और विस्फोटकों को निष्क्रिय करने में सक्षम है।