ट्विशा शर्मा मामले में दूसरी पोस्टमॉर्टम की याचिका पर आज सुनवाई, परिवार ने 40 से ज्यादा मोबाइल नंबरों के सीडीआर की मांग की

ट्विशा शर्मा मामले में दूसरी पोस्टमॉर्टम की याचिका पर आज सुनवाई, परिवार ने 40 से ज्यादा मोबाइल नंबरों के सीडीआर की मांग की

भोपाल, 20 मई। ट्विशा शर्मा के परिजनों ने, जिन्होंने 12 मई को भोपाल में अपने ससुराल में कथित तौर पर आत्महत्या की थी, बुधवार को एक नया बयान जारी किया। उनका कहना है कि एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्था से स्वतंत्र चिकित्सा राय मिलने से लोगों का जांच पर भरोसा बढ़ सकता है। यह याचिका मंगलवार को मजिस्ट्रेट अनुदिता गुप्ता के समक्ष पेश की गई थी। आज इस मामले पर सुनवाई होने की उम्मीद है। परिवार ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य ट्विशा की मौत के संदिग्ध हालात में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और महत्वपूर्ण फोरेंसिक साक्ष्य को सुरक्षित रखना है।

शव पिछले आठ दिन से भोपाल एम्स में रखा गया है। परिवार को चिंता है कि यदि और देरी हुई तो महत्वपूर्ण नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।

ट्विशा के पिता नव निधि शर्मा ने बताया कि यह याचिका इसलिए डाली गई है ताकि उसकी मौत के असली कारणों और हालातों पर कोई संदेह न रहे।

एक प्रेस नोट में परिवार ने मामले की सह-आरोपी गिरिबाला सिंह को 'गिरी हुई बाला' के नाम से संबोधित किया है, जिनको पहले ही अंतरिम जमानत मिल चुकी है।

परिवार ने 40 से अधिक मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन डेटा, इलेक्ट्रॉनिक संचार रिकॉर्ड, इंटरनेट उपयोग लॉग, व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल मेटाडेटा सहित संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के तत्काल संरक्षण और फोरेंसिक रूप से सुरक्षित करने की मांग की है।

परिवार ने कहा कि यदि गिरिबाला सिंह को अपने निर्दोष होने का विश्वास है, तो उन्हें दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग का समर्थन करना चाहिए।

ट्विशा के पिता ने बताया कि सभी फॉरेंसिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ट्विशा के शरीर का अंतिम संस्कार शांति और सम्मान के साथ किया जा सकेगा।

परिवार ने यह भी चिंता जताई कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा हस्तक्षेप या देरी करने से शव के सड़ने के कारण साक्ष्य खराब हो सकते हैं। शर्मा ने कहा कि हमें आशंका है कि प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से महत्वपूर्ण फोरेंसिक परिणामों पर असर पड़ेगा, जिससे न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

इस बयान में उन खबरों का विरोध किया गया है, जिसमें कहा गया है कि एक व्यक्ति, जो अभी जमानत पर है, ने न्यायिक कार्यालय परिसर का उपयोग किया और मीडिया से बात की तथा मृतक के खिलाफ बयान दिए। परिवार ने कहा कि ट्विशा अब जीवित नहीं है, इसलिए वह अपने ऊपर लगाए गए सार्वजनिक आरोपों का बचाव नहीं कर सकती।

परिवार ने यह सवाल भी उठाया कि क्या आम नागरिकों को कानून के अंतर्गत सुरक्षा मिलती है, यदि प्रभावशाली लोग मामले में शामिल हों; या क्या सार्वजनिक संस्थानों का उपयोग किसी मृतक पीड़ित के खिलाफ माहौल बनाने के लिए किया जा सकता है, जो अब अपनी बात नहीं रख सकता।