पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। ममता बनर्जी गुट की ओर से दाखिल याचिका पर गुरुवार, 24 सितंबर को शीर्ष अदालत में सुनवाई होगी। याचिका में चुनाव आयोग के उस अस्थाई फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत TMC के पुराने नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट की सूची में नए सिविल केस के तौर पर दर्ज है।
दोनों गुटों को मिले अलग नाम और चिन्ह
यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा उपचुनावों के बीच सामने आया है। फिलहाल दोनों गुट अपने-अपने आवंटित नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में हैं। ममता गुट की ओर से अदालत में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि पार्टी के कुछ विधायकों की सदस्यता से जुड़े मामले लंबित हैं। गुट का कहना है कि इन मामलों पर स्थिति स्पष्ट होने से पहले उनके आधार पर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत इस स्तर पर चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर क्या रुख अपनाती है, इससे आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय हो सकती है।
उपचुनाव के बीच बढ़ा विवाद
पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद और गहरा गया है। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद दोनों गुट फिलहाल अलग-अलग नाम और प्रतीक के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं। ममता बनर्जी के गुट ने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील भी रखी है कि कुछ बागी विधायकों की सदस्यता और उनके खिलाफ चल रही अयोग्यता संबंधी याचिकाएं अभी लंबित हैं। उनका तर्क है कि इन मामलों का अंतिम फैसला आने से पहले संबंधित विधायकों के दावों को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद में आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर है। अदालत चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर क्या निर्देश देती है, इससे आगे की कानूनी प्रक्रिया और आगामी उपचुनावों को लेकर स्थिति पर असर पड़ सकता है।