नई दिल्ली, 21 मई। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका प्रस्तुत की गई है, जिसमें दिल्ली की सभी अदालतों में मुकदमों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले को प्रस्तुत कर जल्द सुनवाई की प्रार्थना की।
सीजेआई ने याचिकाकर्ता के वकील को बताया कि उन्होंने पहले ही सभी राज्य के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश उच्च न्यायालय पहले से ही इस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं।
सीजेआई ने यह स्पष्ट किया कि यह एक वैकल्पिक सुविधा है, जिसे न्यायाधीशों और वकीलों की सहमति से आसानी से लागू किया जा सकता है। किसी भी अदालत को इसे अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।
वकील ने बेंच से निवेदन किया कि दिल्ली की अदालतों में कम से कम तीन महीने के लिए ऑनलाइन सुनवाई को अनिवार्य करने का निर्देश दिया जाए। इस पर सीजेआई ने कहा कि जिला अदालतों का प्रशासनिक नियंत्रण संबंधित उच्च न्यायालय के पास होता है। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों से जिला अदालतों में भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने बताया कि इस मामले में फैसला लेने का अधिकार उच्च न्यायालय के पास है।
यह याचिका कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली को स्थायी बनाने और अदालतों में भीड़ को कम करने के लिए है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग वकीलों, मुवक्किलों और जजों के लिए समय और संसाधनों की बचत करता है, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों से आने वालों के लिए यह बेहद सहायक साबित हुआ है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने यह भी संकेत दिया कि अदालतों की कार्यवाही को और अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाना आवश्यक है, लेकिन इसे अनिवार्य रूप से लागू करने के बजाय स्वैच्छिक तरीके से अपनाना बेहतर होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अगले सुनवाई की तारीख अभी तक निर्धारित नहीं की है।
दिल्ली उच्च न्यायालय और जिला अदालतों में पहले से ही कुछ मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन याचिकाकर्ता इसे सभी प्रकार के मामलों में अनिवार्य बनाने की मांग कर रहे हैं।