स्पेस में आईवॉश की चुनौती, जानें 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' के बारे में

स्पेस में आईवॉश की चुनौती, जानें 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' के बारे में

नई दिल्ली, 24 मई। अंतरिक्ष के क्षेत्र में अद्भुत रहस्यों के साथ-साथ रोमांच भी विद्यमान है। पृथ्वी पर की गई कोई साधारण क्रिया भी अंतरिक्ष में एक बड़ी समस्या या चुनौती बन सकती है। स्पेस में आंखों को धोने की प्रक्रिया भी ऐसी ही एक चुनौती है, जो पृथ्वी पर सरल है, लेकिन अंतरिक्ष में काफी कठिनाई पेश करती है। इस मुद्दे से निपटने के लिए एस्ट्रोनॉट्स 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' का सहारा लेते हैं।

भारतीय वायुसेना के पायलट और भारत के प्रमुख अंतरिक्ष यात्रियों में से एक ग्रुप कैप्टन शुभांशु शक्ला का पुराना वीडियो हाल ही में सामने आया है, जिसमें वे अंतरिक्ष में चिकित्सा संबंधी छोटी समस्याओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते दिखाई दिए। शुभांशु गगनयान मिशन का हिस्सा रहे हैं।

इस वीडियो में उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में छोटी से छोटी समस्या भी जल्दी ही गंभीर रूप ले सकती है, क्योंकि सबसे नजदीकी अस्पताल धरती पर 400 किलोमीटर नीचे है। इसलिए अंतरिक्ष यात्री उडान से पहले बुनियादी चिकित्सा प्रशिक्षण हासिल करते हैं। शुभांशु ने कहा कि अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी (शून्य गुरुत्वाकर्षण) सामान्य गतिविधियों को भी कठिन बना देती है, और आंख धोने का कार्य इसका एक बड़ा उदाहरण है।

धरती पर यदि आंख में कुछ चला जाए तो हम आसानी से उसे पानी से धो लेते हैं, लेकिन अंतरिक्ष में पानी न तो बहता है और न ही स्थिर रहता है। पानी छोटे-छोटे गोलाकार दानों में तैरने लगता है और पूरे स्पेसक्राफ्ट में इधर-उधर बिखर जाता है। यदि किसी एस्ट्रोनॉट की आंख में चोट लग जाए या धूल चली जाए, तो सामान्य तरीके से उनकी आंख धोना असंभव हो जाता है। इसी समस्या को हल करने के लिए वैज्ञानिक 'सील आई इरिगेशन गॉगल्स' का विकास कर चुके हैं।

ये खास किस्म के गॉगल्स पूरी तरह सील बंद होते हैं और देखने में साइंस फिक्शन फिल्मों के समान लगते हैं। इन गॉगल्स की विशेषता यह है कि ये आंखों पर पूरी तरह से फिट होते हैं और इनमें दो ट्यूब होती हैं। एक ट्यूब स्टराइल सलाइन (शुद्ध पानी) को आंखों में पहुंचाती है ताकि आंख को धोया जा सके, जबकि दूसरी ट्यूब सक्शन के जरिए गंदे पानी को तुरंत बाहर निकाल लेती है। यह एक पूरी तरह से ‘क्लोज्ड सिस्टम’ है, जिससे पानी कहीं भी फैल नहीं सकता और कैबिन साफ रहता है। गॉगल्स का डिजाइन स्विमिंग गॉगल्स के समान है।

शुभांशु शक्ला ने कहा, “मेरी खुशी है कि मेरे मिशन के दौरान मुझे इसका उपयोग नहीं करना पड़ा, लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों की यही इच्छा होती है कि इन उपकरणों की आवश्यकता न पड़े। क्योंकि चांद की धूल या अन्य कणों से आंखों को खतरा हो सकता है, और इसलिए यह उपकरण बहुत उपयोगी साबित होता है।”