लखनऊ, 20 मई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को सड़क सुरक्षा पर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस अवसर पर उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए। सीएम ने हाल ही में लखीमपुर खीरी, अमरोहा, आगरा और अलीगढ़ में हुए सड़क हादसों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन हमारे लिए महत्वपूर्ण है और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें हमारे देश और राज्य के लिए हानिकारक हैं। ये हादसे अक्सर जागरूकता की कमी के कारण होते हैं, इसलिए सभी जनपदों में सड़क सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाए जाने चाहिए। दुर्घटनाओं से जुड़े सभी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, और विशेष रूप से ऐसे स्थानों की पहचान की जाए जहां पर ये हादसे अधिक होते हैं।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सड़कों पर स्टंटबाजी, तेज गति, और नशे में गाड़ी चलाना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जनता की जागरूकता और सभी विभागों के समन्वय की आवश्यकता है। इसके लिए हमें एक ठोस योजना के साथ आगे बढ़ना होगा। जिला प्रशासन, परिवहन और पुलिस सहित सभी संबंधित विभाग सड़क सुरक्षा पर नियमित बैठकें करें। अवैध वाहनों का संचालन किसी भी हालात में मंजूर नहीं है और सड़क के किनारे से अवैध स्टैंड को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए।
सही स्थान पर पार्किंग सुनिश्चित की जानी चाहिए। शासन स्तर पर तैनात परिवहन विभाग के अधिकारियों को भी फील्ड में काम करने की आवश्यकता है। जनपदों में तैनात आरटीओ और एआरटीओ की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। परिवहन निगम को यह सुनिश्चित करना होगा कि केवल सही फिटनेस वाली बसें ही सड़कों पर चलें और उनकी बसें केवल अपने स्टैंड पर ही खड़ी रहें। चालकों और परिचालकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण आवश्यक है। सीएम ने स्कूल बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्देश दिया कि स्कूल प्रबंधन वाहनों की फिटनेस की जांच अनिवार्य रूप से कराएं। यदि कोई वाहन बार-बार चालान होता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सीएम योगी ने सड़क सुरक्षा के प्रति जन जागरूकता पर विशेष ध्यान देने की बात की। चौराहों, टोल प्लाजा, महत्वपूर्ण स्थलों और व्यस्त मार्गों पर सार्वजनिक संबोधन प्रणाली के माध्यम से यातायात नियमों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए। सीट बेल्ट, हेलमेट और अन्य सड़क सुरक्षा मानकों के पालन के लिए प्रेरित करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। जनपदों में वेंडिंग जोन विकसित किए जाएं और स्ट्रीट वेंडर्स को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए। हाईवे, एक्सप्रेसवे और व्यस्त मार्गों पर नियमित पेट्रोलिंग होनी चाहिए और एंबुलेंस की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अस्पतालों में इलाज की व्यापक व्यवस्था हो ताकि दुर्घटना के शिकार लोगों को त्वरित स्वास्थ्य सेवा मिल सके।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना का बेहतर ढंग से कार्यान्वयन किया जाए, जिससे आम जनता को सार्वजनिक परिवहन से यात्रा में सहूलियत मिलेगी। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच दुर्घटनाओं में 21 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 22 प्रतिशत की कमी आई है।
मुख्यमंत्री ने लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रदेश की सड़कों के ब्लैक स्पॉट्स की पहचान करें और समय सीमा के भीतर उनके समाधान की दिशा में काम करें। उचित स्थानों पर साइनेज लगाए जाएं और चौराहों पर टेबलटॉप स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं। सीएम ने कहा कि टोल प्लाजा के आसपास सफाई सुनिश्चित की जाए और अनियमित रूप से खड़े वाहनों को हटाया जाए। सार्वजनिक संबोधन प्रणाली के माध्यम से टोल प्लाजा पर ट्रैफिक नियमों की जानकारी नियमित रूप से दी जाती रहे।
यातायात पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि सड़क सुरक्षा कोष से प्राप्त अनुदान के तहत 25 चार पहिया और 62 दोपहिया इंटरसेप्टर तथा 82 स्पीड लेजर गन जनपदों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। उत्तर प्रदेश एकमात्र राज्य है जहां सभी 75 जनपदों के 487 महत्वपूर्ण पुलिस थानों पर जीरो फैटिलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना लागू है। इन थानों में 573 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों का गठन किया गया है, जिसमें एक उपनिरीक्षक और चार मुख्य आरक्षी शामिल हैं। पिछले चार महीनों में इस योजना के कार्यान्वयन से 566 लोगों की जान बचाई गई है।