सीएम योगी का आदेश: गर्मी में बिना व्यवधान के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें

सीएम योगी का आदेश: गर्मी में बिना व्यवधान के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें

लखनऊ 24 मई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गर्मियों की तीव्रता और बिजली की बढ़ती मांग के बीच राज्य में लगातार और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को बिजली संकट का सामना नहीं करना चाहिए, इस हेतु सभी स्तरों पर नियमित निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने ऊर्जा विभाग से कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में वे पूरी संवेदनशीलता से काम करें। रविवार को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत के साथ बैठक में उन्होंने विद्युत आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने नियामकों के साथ-साथ राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए ताकि गर्मी के मौसम में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पादन इकाइयों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और संयंत्रों के तकनीकी दक्षता एवं रखरखाव पर प्राथमिकता दी जाए।

बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल उत्पादन क्षमता अब 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे थर्मल पावर प्लांट्स की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है, जबकि जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट शक्ति उपलब्ध है। इसके अलावा, मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं के माध्यम से राज्य को 3,742 मेगावाट की संयुक्त क्षमता प्राप्त हो रही है।

बैठक में बताया गया कि 2022 की तुलना में 2026 तक उत्पादन निगम की स्थापित क्षमता में 86 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से लगभग 10,000 मेगावॉट बिजली उत्पादन प्राप्त हो रहा है। सीएम ने प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क को आधुनिक और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति प्रणाली में मजबूत ट्रांसमिशन संरचना बेहद जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मियों में तकनीकी समस्याओं को न्यूनतम रखा जाए और ट्रांसमिशन नेटवर्क की निरंतर निगरानी की जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास वर्तमान में 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनों का संचालन हो रहा है। इसके अलावा, प्रदेश में 715 उपकेंद्रों के माध्यम से 2,05,632 एमवीए क्षमता उपलब्ध है। ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत बताई गई है, और पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था को और अधिक जिम्मेदार और उपभोक्ता केंद्रित बनाया जाए। उन्होंने फीडर के स्तर पर जवाबदेही तय करने के निर्देश देते हुए कहा कि ट्रांसफार्मर की खराबी, फीडर में बाधा या शिकायत निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आंधी-तूफान और उच्च तापमान जैसी स्थिति में फील्ड स्तर पर तेजी से प्रतिक्रिया प्रणाली को सक्रिय रखा जाए।

बैठक में बताया गया कि 4, 7 और 15 मई को आई आंधी-तूफान के कारण 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए, लेकिन मरम्मत का काम तेजी से किया गया। मुख्यमंत्री ने भूमिगत केबल वाले क्षेत्रों में खुदाई से पहले सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त करने के निर्देश दिए ताकि विद्युत व्यवस्था प्रभावित न हो। उन्होंने ट्रांसफार्मर क्षति की घटनाओं में कमी को सकारात्मक बताते हुए इसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया।

बैठक में बताया गया कि 2022-23 की तुलना में पावर ट्रांसफार्मर की क्षति में करीब 80 प्रतिशत की गिरावट आई है। जहां 2022-23 में 429 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 87 रह गई। इसके साथ ही, 100 केवीए से अधिक क्षमता वाले वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षति दर में भी गिरावट आई है। वर्ष 2022-23 में 39,177 बड़े ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए, जबकि 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर 20,292 रह गया। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा तंत्र की स्थापना, समय पर मरम्मत और जिम्मेदारी तय होने के कारण यह सुधार संभव हुआ है।

बैठक में उल्लेख किया गया कि इस वर्ष अप्रैल और मई में तापमान में पिछले वर्ष की तुलना में बड़ा इजाफा हुआ है, जिससे राज्य में बिजली की मांग में वृद्धि हो रही है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत डिमांड मेट 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच गया, जबकि पीक डिमांड मेट 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट हो गया।

बैठक में बताया गया कि 20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश ने सबसे अधिक बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर स्थान प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने बढ़ती मांग के अनुरूप बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव स्रोतों से बिजली खरीदने और आपूर्ति प्रबंधन के निर्देश दिए। 15 मई से विभिन्न पावर प्लांटों में विविध कारणों से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके बावजूद, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने 12 राज्यों के साथ पावर बैंकिंग व्यवस्था की है।

मुख्यमंत्री ने भविष्य की मांग को देखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि 2015 से 2026 के बीच प्रदेश ने कुल 32,305 मेगावाट की विद्युत क्षमता के लिए करार किए हैं, जिसमें पिछले तीन वर्षों में लगभग 62 प्रतिशत क्षमता जोड़ी गई है। 2029 तक मांग की पूर्ति के लिए 10,719 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराने के लक्ष्यों पर काम किया जा रहा है।