चंडीगढ़, 23 मई। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को बताया कि राज्य सरकार हर खेत को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराने के लिए गंभीर है।
सिंचाई विभाग को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि किसान समूहों का गठन करके 10 एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि के लिए सामुदायिक तालाबों का निर्माण किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि इन तालाबों में नहर के पानी को भरा जाएगा और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के माध्यम से फसलों को पानी दिया जाएगा। इन तालाबों के निर्माण के लिए सरकार 85 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान करेगी।
यह बात उन्होंने हरियाणा विजन-2047 के तहत सिंचाई और जल संसाधन विभाग की पांच वर्षीय कार्य योजना की समीक्षा बैठक में कही।
उन्होंने आगे ये भी कहा कि विभाग को पारंपरिक सिंचाई तकनीकों से परे जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'पर ड्रॉप--मोर क्रॉप' के सिद्धांत के अनुरूप कार्य करना चाहिए, जिससे सीमित जल संसाधनों का सही प्रबंधन किया जा सके और '2047 तक विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सीमित जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग संभव है और विभाग की योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को खुले खेतों में सिंचाई कम करने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए।
सिंचाई की लागत को किसानों के लिए न्यूनतम किया जाएगा और नई व्यवस्था के तहत किसानों को ट्यूबवेल लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि इस योजना को प्रारंभ में नौ जिलों - भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर और सिरसा - में लागू किया जाए, जहां किसान समूह बनाकर 10 एकड़ या उससे अधिक भूमि वाले किसानों के लिए 85 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी पर सामुदायिक तालाबों का निर्माण होगा।
इन तालाबों में पानी नहर की पाइपलाइनों से पहुंचाया जाएगा और उन पर सौर पैनल स्थापित किए जाएंगे।
सीएम ने बताया कि जुड़े हुए खेतों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का कार्यान्वयन किया जाएगा, जिससे किसान आवश्यकता अनुसार अपनी फसलों को सिंचाई कर सकेंगे।
इससे ट्यूबवेल की जरूरत खत्म हो जाएगी और बिजली तथा पानी पर निर्भरता कम होगी।
खुले खेतों में सिंचाई को समाप्त कर दिया जाएगा, ताकि कम जल में अधिक क्षेत्र की सिंचाई की जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई विभाग इस साल चुने हुए नौ जिलों में आधुनिक कृषि तकनीकी कंपनियों को शामिल करते हुए ग्रामीण कृषि भूमि को सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों में बदलने के लिए निविदाएं जारी कर सकता है।