सीआईआई और साइप्रस चैंबर ऑफ कॉमर्स के बीच महत्वपूर्ण समझौता, व्यापारिक संबंधों को मिलेगा नया आयाम

सीआईआई और साइप्रस चैंबर ऑफ कॉमर्स के बीच महत्वपूर्ण समझौता, व्यापारिक संबंधों को मिलेगा नया आयाम

मुंबई, 21 मई। भारतीय उद्योग संगठन सीआईआई ने गुरुवार को साइप्रस चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (सीसीसीआई) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह घटनाक्रम साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य भारतीय और साइप्रस के उद्योगों के मध्य निवेश बढ़ावा देना, संयुक्त उपक्रम स्थापित करना, व्यापार प्रतिनिधिमंडल का गठन करना, व्यापार मेले आयोजित करना और विभिन्न सेक्टरों में सहयोग को मजबूत करना है।

साइप्रस-इंडिया बिजनेस फोरम में साइप्रस गणराज्य के परिवहन और संचार मंत्री एलेक्सिस वाफेडेस तथा रिसर्च, इनोवेशन एवं डिजिटल पॉलिसी के उप मंत्री निकोडेमोस डामियानू भी उपस्थित रहे।

एक अन्य महत्वपूर्ण समझौते के अंतर्गत सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) ने साइप्रस डिफेंस एंड स्पेस इंडस्ट्री क्लस्टर (सीआईडीएससी) के साथ सामंजस्य पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य रक्षा निर्माण, एयरोस्पेस नवाचार, ड्यूल-यूज तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को बढ़ाना, औद्योगिक आदान-प्रदान को मजबूत करना और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देना है। साथ ही, रक्षा और सामरिक क्षेत्रों में नए सहयोग के अवसरों की खोज करना भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।

केंद्र सरकार में यूरोप मामलों के संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे ने इस अवसर पर भारत और साइप्रस के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग की महत्वपूर्णता को रेखांकित किया और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के प्रति वचनबद्धता जताई।

सीआईआई के राष्ट्रीय कौशल और आजीविका केंद्र समिति के अध्यक्ष बी. थियागराजन ने कहा कि सीआईआई-सीसीसीआई सहयोग व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खोलेगा और दोनों देशों के आपसी आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ बनाएगा। उन्होंने आगे कहा कि मजबूत औद्योगिक साझेदारी से तकनीकी, निर्माण, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, डिजिटल नवाचार और सेवा क्षेत्रों में तेज प्रगति होने की उम्मीद है।

साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस 20 से 23 मई 2026 तक भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आए हैं। यह उनके राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की पहली यात्रा है।

क्रिस्टोडौलिडेस की यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जून 2025 में की गई ऐतिहासिक साइप्रस यात्रा के एक वर्ष के भीतर हो रही है। यह यात्रा आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर इस समय जब साइप्रस यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता कर रहा है।

इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस और प्रधानमंत्री मोदी व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा, संस्कृति, लोगों की आवाजाही, रक्षा और सुरक्षा, एआई, फिनटेक, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही, दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी करेंगे।

राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे, जो उनके सम्मान में एक आधिकारिक भोज का आयोजन करेंगी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी उनसे मुलाकात करेंगे।

भारत और साइप्रस के बीच लंबे समय से प्रभावी और मजबूत संबंध रहे हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग को और अधिक बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, विशेष रूप से भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के संदर्भ में। 10 फरवरी 2027 को दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 65 वर्ष पूरे करेंगे।