सेना की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश, आर्मी ने किया सतर्क रहने का आग्रह

सेना की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश, आर्मी ने किया सतर्क रहने का आग्रह

नई दिल्ली, 22 मईः भारतीय सेना ने सोशल मीडिया और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो के संबंध में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। सेना ने नागरिकों से अपवाहों और गलत जानकारी से सावधान रहने की सलाह दी है। सेना का कहना है कि कुछ पूर्व सैनिक और एक भगोड़ा व्यक्ति जानबूझकर सेना की छवि को गिराने के लिए झूठे और भ्रामक आरोप फैला रहे हैं। इस वायरल वीडियो में चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव और पी. नरेंद्र नजर आ रहे हैं। ये लोग सेना के सदस्य रहे हैं, लेकिन इन्हें अनुशासनहीनता और असामाजिक व्यवहार के कारण सेवा से बर्खास्त किया गया है।

सेना ने स्पष्ट किया है कि इन लोगों पर सैन्य नियमों का उल्लंघन करने तथा सेवा की गरिमा के खिलाफ कार्य करने के आरोप सही पाए गए थे, जिसके बाद उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई। इसके अतिरिक्त, प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो में मौजूद एक अन्य व्यक्ति, शंकर सिंह गुज्जर, भी शामिल है।

सेना ने शंकर सिंह गुज्जर को भगोड़ा बताया है। जानकारी के अनुसार, वह अपनी ड्यूटी छोड़कर भाग गया था और उसके खिलाफ सैन्य न्यायालयों के साथ-साथ सिविल अदालतों में भी अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है।

भारतीय सेना ने कहा है कि ये सभी व्यक्ति अपनी बर्खास्तगी और व्यक्तिगत गलतियों से ध्यान भटकाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। सेना का आरोप है कि ये लोग जानबूझकर वीडियो और संदेशों का प्रसार कर रहे हैं जिसका लक्ष्य आम जनता में भ्रम फैलाना और सेना की विश्वसनीयता को चुनौती देना है। सेना ने उल्लेख किया कि इससे पहले 17 सितंबर 2024 को भी चंदू चव्हाण और हरेंद्र यादव द्वारा फैलाए गए झूठे वीडियो और संदेशों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया था।

उस समय भी सेना ने लोगों से अपवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की गुजारिश की थी। भारतीय सेना ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी अनचाहे जानकारी, वीडियो या बयानों को सत्यापन के बिना साझा न करें।

सेना ने चेतावनी दी है कि गलत जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक विश्वास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। सेना ने दोहराया कि भारतीय सेना एक अनुशासित और पेशेवर संगठन है, जो देश की सुरक्षा और अखंडता के प्रति पूरी निष्ठा से कार्य करती है। इसलिए भ्रामक प्रचार के माध्यम से सेना की प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाने के प्रयासों से सतर्क रहना आवश्यक है।