मुंबई, 23 मई। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक ही परिवार के सात सदस्यों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके छोटे निवेशकों को प्रभावित किया और शेयरों की सार्वजनिक सिफारिश करने से पहले खरीदार बनकर अवैध लाभ अर्जित किया। सेबी के अंतरिम प्रवर्तन आदेश में बताया गया है कि परिवार के इन सदस्यों ने टेलीग्राम, व्हाट्सएप और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से शेयर बाजार से संबंधित टिप्स साझा कर बाजार में हेरफेर किया।
आरोप है कि ये सदस्य एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध शेयरों का पहले से ही अधिग्रहण करते थे और उसके बाद उन शेयरों की सिफारिश सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से करते थे। सेबी के अनुसार, उन्होंने प्रारंभिक चरण में लगभग 20.25 करोड़ रुपए का गैरकानूनी लाभ कमाया।
सेबी के आदेश में कहा गया, "इन व्यक्तियों ने धोखाधड़ी, बाजार में हेरफेर और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों में लिप्त होकर कार्य किया है। उन्होंने शेयरों की कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए सिफारिशें की और जांच के दौरान 82 शेयरों में मुनाफा कमाया।"
सेबी को खासकर कम लिक्विडिटी वाले शेयरों में प्रमोशनल पोस्ट से संबंधित संदिग्ध ट्रेडिंग पैटर्न का पता चला।
नियामक ने अदालत से अनुमति मिलने के बाद 21 जनवरी से 24 जनवरी 2026 के बीच तलाशी और जब्ती अभियान चलाया, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पकड़े गए और आरोपियों के बयान शपथ के तहत दर्ज किए गए।
सेबी ने 1 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 के बीच की अवधि की जांच की, जिसमें देखा गया कि सभी सातों का कुल ग्रॉस ट्रेड वैल्यू पहले 548.62 करोड़ रुपए था, जो इस अवधि में बढ़कर 1,023.40 करोड़ रुपए हो गया, जो लगभग 86 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
नियामक ने यह भी बताया कि इन सदस्यों का कुल स्क्वायर-ऑफ मुनाफा 17.06 करोड़ रुपए से बढ़कर 58.40 करोड़ रुपए हो गया, यानी इसमें 242 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सेबी ने रोहन गुप्ता और शेरोन गुप्ता को प्रमुख लाभार्थियों के रूप में पहचाना है। इन दोनों ने मिलकर अनुमानित रूप से लगभग 50 करोड़ रुपए का लाभ कमाया।
जांच के दौरान ऐसे सबूत भी मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि आरोपियों को यह जानकारी थी कि सेबी छोटे स्तर के ऑपरेटरों पर भी कठोर कार्रवाई कर रहा है और उन्हें डर था कि वे सेबी की नजर में आ सकते हैं।