कोलकाता, 20 मई। 2015 की विवादास्पद पोस्ट को लेकर चल रहे विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायोनी घोष ने बुधवार को कहा कि उन्होंने पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी और उनका किसी की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाने का इरादा नहीं था। सायोनी घोष ने बातचीत के दौरान बताया कि उस पोस्ट को उन्होंने नहीं बल्कि किसी हैकर ने साझा किया था।
उन्होंने कहा, "मैं हमेशा यही बयान देती आई हूँ कि वह पोस्ट मैंने नहीं किया। 2021 में जब यह मामला फिर से चर्चा में आया, तब मैंने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। कोई भी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता। मैं खुद एक हिंदू हूं।"
सायोनी घोष ने कहा कि 2015 में उनकी उम्र केवल 22 वर्ष थी और उस समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' उनके लिए नया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उन्होंने उस कार्टून को बनाया था और न ही उसे सार्वजनिक किया था।
उन्होंने आगे कहा, "यदि किसी की जांच होनी चाहिए, तो उस व्यक्ति की होनी चाहिए, जिसने वह कार्टून बनाया। जब 2021 में यह मुद्दा मेरे ध्यान में आया, तब मैंने तुरंत वह पोस्ट हटवा दिया और सार्वजनिक माफी भी मांगी।"
यह विवाद तब शुरू हुआ जब उनके एक पुराने पोस्ट को लेकर काफी आलोचना हुई थी। इस पर जनाक्रोश देखने को मिला और उनके खिलाफ पुलिस में शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं। इसके बाद सायोनी घोष ने एक बयान जारी कर कहा था कि उन्होंने वह पोस्ट नहीं किया था।
हालांकि यह विवाद लगातार उनके साथ बना रहा और उन्हें राजनीतिक तथा सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा। सायोनी घोष ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता इस पुराने विवाद का इस्तेमाल उन्हें डराने और दबाने के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है। वह संसद के अंदर और बाहर हमेशा सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाती रही हैं, शायद इसी कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। मुझे लगता है कि भाजपा को विरोध की आवाज सहन नहीं होती, और उन्हें लोकतंत्र में विपक्ष का अस्तित्व नहीं चाहिए।"
उन्होंने बताया, "लोग सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि जो सायोनी घोष का सिर काटेगा, उसे एक करोड़ रुपये का इनाम दिया जाएगा। भाजपा के नेता और कार्यकर्ता ऐसी बातें कर रहे हैं। वहीं, वही लोग महिला आरक्षण और सशक्तीकरण की बात करते हैं। क्या ये दोनों बातें साथ चल सकती हैं? बिल्कुल नहीं।"
उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं की आवाज उठाने को पसंद नहीं करती, जबकि बंगाल की संस्कृति हमेशा महिलाओं को मजबूत और मुखर रहने का सम्मान देती है।