लखनऊ, 22 मई। समाजवादी पार्टी ने बकरीद के लिए दिल्ली सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि सरकार को विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेताओं के साथ बातचीत करनी चाहिए ताकि समस्या का हल निकले, न कि संघर्ष। भाजपा केवल टकराव की स्थिति पैदा करना चाहती है।
सपा के प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, "धर्म और त्योहारों को लेकर जो दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, उनमें सभी धार्मिक नेताओं की राय शामिल होना आवश्यक है। जब दिशानिर्देश एकतरफा होते हैं, तो इससे समस्याएं पैदा होती हैं। अगर एक ओर कहा जाता है कि कुर्बानी नहीं होनी चाहिए और दूसरी ओर भाजपा के लोग मांस का सेवन करते हैं और इसके वीडियो साझा करते हैं, तो यह साफ है कि बातचीत होनी चाहिए। पर भाजपा तो टकराव चाहती है।"
गाय की कुर्बानी पर उच्च न्यायालय की टिप्पणी के संदर्भ में वर्मा ने कहा, "इस देश में जहां पत्थरों की पूजा होती है और आसमान की ओर सजदा किया जाता है, वहां गाय की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। यह तथ्य अलग है कि भाजपा के लोग पूर्वोत्तर में गायों की हत्या कर वीडियो बनाते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में संस्कृति भिन्न होती है, इसलिए किसी भी नीतिगत निर्णय से पहले प्रशासन और धार्मिक नेताओं के साथ बैठकर सहमति बनानी चाहिए।"
वंदे मातरम के विवाद पर उन्होंने कहा कि यह विषय अनावश्यक रूप से उछाला जा रहा है। देश की जनता राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का सम्मान करती है। यदि कोई इनका अपमान कर रहा है, तो यह पूरी तरह गलत है। राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के प्रति कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एनकाउंटर वाले बयान पर भी सपा प्रवक्ता ने उत्तर दिया। उन्होंने कहा, "नए मुख्यमंत्री जो बने हैं, उनकी स्थिति के बारे में सब जानते हैं। जिन पर खुद आपराधिक मामले हैं, क्या वे अब कानून की बात करेंगे? यह दुखद है कि बिहार ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया है।"
आशुतोष वर्मा ने आगे कहा कि बिहार, असम, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के बीच यह प्रतिस्पर्धा चल रही है कि कौन सबसे कठोर हिंदू बन सकता है और कौन अधिक बुलडोजर चला सकता है। भाजपा में लोकप्रियता का मतलब है कि आप हिंसा के लिए तैयार रहें। इन लोगों को कानून व्यवस्था से कोई सरोकार नहीं है।