नई दिल्ली, 22 मई। भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक अहमदाबाद में आयोजित हुई। इस बैठक में तटरक्षक बल, नौसेना, वायुसेना और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी शामिल हुए। भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि की अध्यक्षता में हुई यह ऑफशोर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन कमेटी (ओएससीसी) की 138वीं बैठक थी। इस दौरान देश के समुद्री क्षेत्रों में स्थित तेल और गैस के प्रतिष्ठानों, ऊर्जा प्लेटफार्मों और अन्य महत्वपूर्ण ऑफशोर संपत्तियों की सुरक्षा प्रणालियों का गहन विश्लेषण किया गया। बैठक में ड्रोन और मानव रहित प्रणालियों द्वारा उत्पन्न संभावित सुरक्षा खतरों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
यह जानना महत्वपूर्ण है कि समुद्री सीमाओं और ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा केवल पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है; इसके लिए नवीनतम निगरानी तंत्र और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की आवश्यकता है। समिति ने समुद्री क्षेत्र में निगरानी की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में अंडमान और निकोबार क्षेत्र में बढ़ती ऑफशोर खोज गतिविधियों के चलते सुरक्षा जिम्मेदारियों में आ रही चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।
इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो, डीजी शिपिंग, महानिदेशक हाइड्रोग्राफर, ऑयल एंड नेचुरल गैस आयोग और विभिन्न राज्यों की पुलिस के उच्च अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में स्थित ऑफशोर प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना एवं उसे और अधिक सुरक्षित बनाना था। इस दौरान समुद्री सुरक्षा से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर गहराई से चर्चाएँ हुईं।
समुद्री क्षेत्र की निगरानी के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विचार विमर्श किया गया। इसके साथ ही, बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में भारत की ऑफशोर संपत्तियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा हुई। बैठक में आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और ड्रोन तथा मानव रहित प्रणालियों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों का भी गंभीरता से अवलोकन किया गया।
इसके अलावा, अंडमान और निकोबार क्षेत्र में बढ़ती ऑफशोर खोज और ऊर्जा गतिविधियों के संदर्भ में सुरक्षा चुनौतियों का मूल्यांकन किया गया। बैठक के समापन पर सभी संबंधित एजेंसियों और हितधारकों ने भारत की ऑफशोर संपत्तियों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण समुद्री अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपसी सहयोग और समन्वय को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
यह बैठक भारत की समुद्री सुरक्षा प्रणाली को भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।