संजय उपाध्याय ने भोजशाला के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्णय का किया स्वागत, कहा- यह हिंदुओं की आस्था का प्रतीक

संजय उपाध्याय ने भोजशाला के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्णय का किया स्वागत, कहा- यह हिंदुओं की आस्था का प्रतीक

बीजेपी नेता संजय उपाध्याय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला के संबंध में दिए गए निर्णय का स्वागत करते हुए इसे हिंदुओं की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक सचाई की जीत माना। उनका कहना है कि भोजशाला केवल एक भवन नहीं है, बल्कि यह मां सरस्वती की पूजा का एक प्राचीन स्थान है। यहां पहले देशभर के विद्वान अध्ययन और शिक्षण के कार्य में संलग्न होते थे, और भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा से संबंधित गतिविधियों का आयोजन किया जाता था।

उनका यह भी कहना है कि समय के साथ इस स्थल को विवादास्पद बनाने का प्रयास किया गया और उस पर कब्जा करने के प्रयास भी हुए। लेकिन पुरातत्व विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों से स्पष्ट होता है कि भोजशाला हिंदुओं की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी हुई है। उपाध्याय ने इसे मां सरस्वती का मंदिर और एक प्राचीन विश्वविद्यालय बताया।

उपाध्याय ने कहा कि शुक्रवार को भोजशाला में शाम की भव्य आरती के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने लोगों की आस्था को स्पष्ट रूप से दर्शाया। उनका कहना है कि भविष्य में वहां हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा का आयोजन नियमित रूप से होगा और मां सरस्वती की आराधना पहले की तरह जारी रहेगी।

इस अवसर पर संजय उपाध्याय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर आगे बढ़ रहा है, जबकि विश्व विभिन्न संकटों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य पूर्व की स्थिति जैसे कई वैश्विक मुद्दों ने अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, लेकिन भारत ने इन चुनौतियों का मजबूती से सामना किया।

उपाध्याय ने बताया कि हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट की लंबी बैठक भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोविड के दौरान भी आर्थिक मजबूती का प्रदर्शन किया और अब कई देश भारत में निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य 2047 से पहले भी संभव है।

साथ ही, संजय उपाध्याय ने बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी और अवैध पशु कटान पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्णय को सराहनीय बताया, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया कि बकरीद पर बकरी की कुर्बानी का धर्म से कोई सीधा संबंध नहीं है।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने भी बकरीद के दौरान अवैध पशु कटान और गौवंश की तस्करी को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने प्रशासन को सतर्क रहने का निर्देश देने के लिए महाराष्ट्र सरकार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पहले विधान भवन में इस मुद्दे को उठाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप कुछ मामलों में कठोर कार्रवाई भी हुई थी। उनका कहना है कि पुलिस और महानगर पालिका को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि कहीं भी खुली जगह पर या अवैध तरीके से पशु कटान न हो।