सैनिक विद्यालयों की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका: अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल

सैनिक विद्यालयों की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका: अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल

नई दिल्ली/इटानगर, 24 मई। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने कहा कि सैनिक विद्यालयों ने अनुशासित, देशभक्त और सेवाभावी युवाओं की कई पीढ़ियों को तैयार करके राष्ट्र निर्माण में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राज्यपाल ने नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित सैनिक विद्यालयों के वार्षिक सम्मेलन में भाग लिया।

सैनिक विद्यालय रीवा के पूर्व छात्रों में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लेफ्टिनेंट गवर्नर एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत चौहान और सेवानिवृत्त वायु मार्शल पीके रॉय समेत कई अन्य प्रमुख लोग मौजूद थे।

राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि सैनिक विद्यालयों ने अनुशासन, देशभक्ति और सेवा की भावना वाले युवाओं की पीढ़ियां तैयार करके राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने बताया कि इन संस्थानों में चरित्र, अनुशासन, नेतृत्व, शैक्षणिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय भावना पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिससे जिम्मेदार और राष्ट्रसेवक नागरिकों का निर्माण होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सैनिक विद्यालय निरंतर ऐसे अधिकारियों, प्रशासकों, पेशेवरों और लोक सेवकों का निर्माण कर रहे हैं जो भारत के विकास और सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

राज्यपाल ने उल्लेख किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे अभियानों में भारतीय सशस्त्र बलों की साहस और पेशेवर रूप से की गई कार्यवाही, समर्पण, तत्परता और देशभक्ति की भावना को दिखाती है, जिसे सैनिक विद्यालय युवा पीढ़ी में उभारा चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे भारत विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, अनुशासित नेतृत्व, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र के भविष्य की सुरक्षा और प्रगति की जिम्मेदारी निभाने वाली सक्षम पीढ़ी के निर्माण में सैनिक विद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

सैनिक विद्यालय रीवा का भारत के शैक्षणिक और सैन्य इतिहास में एक अद्वितीय स्थान है। 1962 में इसकी स्थापना के बाद, इस संस्थान ने कई विशिष्ट पूर्व छात्रों को तैयार किया है जिनमें सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं, खेल और सार्वजनिक जीवन के विविध क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने वाले लोग शामिल हैं।