राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने साइप्रस के राष्ट्रपति का किया स्वागत, भारत और साइप्रस के रिश्तों को बताया रणनीतिक सहयोग

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने साइप्रस के राष्ट्रपति का किया स्वागत, भारत और साइप्रस के रिश्तों को बताया रणनीतिक सहयोग

नई दिल्ली, 22 मई। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में साइप्रस गणराज्य के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडोलिड्स का औपचारिक स्वागत किया। इस मौके पर राष्ट्रपति मुर्मु ने उनके सम्मान में एक भोज का आयोजन किया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने साइप्रस के राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और साइप्रस के बीच संबंध विश्वास और सद्भावना पर आधारित हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों का द्विपक्षीय सहयोग अब 'रणनीतिक साझेदारी' का रूप ले चुका है, जो आपसी विश्वास और सहयोग की गहराई को दर्शाता है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत-साइप्रस संबंध एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें रक्षा, सुरक्षा, तकनीकी, वित्तीय सेवाएं, कनेक्टिविटी और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि साइप्रस भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रमुख स्रोतों में से एक है। साइप्रस की कंपनियां भारत के साथ व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाने के लिए निरंतर रुचि दिखा रही हैं। भारत का बड़ा बाजार, डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढांचा और विनिर्माण क्षमता साइप्रस के व्यवसायों के लिए विशाल संभावनाएं प्रस्तुत करती हैं।

उन्होंने कहा कि तकनीकी और नवाचार भारत-साइप्रस संबंधों के सबसे आगे के क्षेत्रों के रूप में उभर रहे हैं। भारत की युवा प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और स्टार्टअप इकोसिस्टम साइप्रस के नवाचार क्षेत्र के साथ मिलकर नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

उन्होंने सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष, सतत विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग की विशाल संभावनाओं पर भी बल दिया।

राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि साइप्रस, यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता के दौरान, भारत और यूरोप के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के संदर्भ में।

उन्होंने सीमा पार आतंकवाद और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर साइप्रस के समर्थन की सराहना की। राष्ट्रपति मुर्मु ने साइप्रस की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत के दृढ़ समर्थन को फिर से दोहराया।

बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि भारत और साइप्रस के बीच घनिष्ठ सहयोग दोनों देशों के लोगों के लिए व्यापक लाभ पहुंचा सकता है।