नई दिल्ली, 22 मई। हाल के दिनों में भारत और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक कदम उठाए गए हैं। इन दोनों देशों की सेनाएँ न केवल सीमा सुरक्षा और सामरिक समन्वय तक सीमित हैं, बल्कि समुद्री सुरक्षा, संयुक्त प्रशिक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे व्यापक विषयों पर भी साथ मिलकर काम कर रही हैं। इसी सिलसिले में भारत के बांग्लादेश के लिए नियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने भारतीय थल सेना के महानिदेशक जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की। इस वार्ता में भारत-बांग्लादेश रक्षा संबंधों को और मजबूती देने, सीमा सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने और आर्मी-टू-आर्मी संपर्कों में नए आयाम जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक और समुद्री उपस्थिति लगातार बढ़ रही है।
भारतीय नौसेना का आईओएस सागर-26 मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। यह मिशन कई सप्ताह तक समुद्र में सहयोग, साझेदारी और संयुक्त प्रशिक्षण का संदेश फैलाने के बाद सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अभियान के दौरान तैनात भारतीय युद्धपोत आईएनएस सुनयना बुधवार को अपने देश लौट आया। जहाज की वापसी के अवसर पर आयोजित फ्लैग-इन समारोह ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री उपस्थिति और सहयोगी देशों के साथ संबंधों की गहराई को दर्शाया।
‘वन ओशन, वन मिशन’ के सिद्धांत पर आधारित आईओएस सागर-26 मिशन का उद्देश्य केवल समुद्री सुरक्षा को सुनिश्चित करना नहीं था, बल्कि समुद्र को भरोसे, साझेदारी और सहयोग का एक मंच बनाना भी था। इस मिशन के दौरान भारत सहित 17 देशों के नौसैनिक एक ही युद्धपोत पर तैनात थे, जिनमें बांग्लादेश के नौसैनिक भी शामिल थे। सभी ने मिलकर संयुक्त प्रशिक्षण लिया और समुद्र में विभिन्न परिचालन गतिविधियों में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने एक-दूसरे की सैन्य कार्यप्रणाली और रणनीतियों को समझा।
यह मिशन विभिन्न देशों के बीच आपसी विश्वास और तालमेल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में बांग्लादेश, इंडोनेशिया, केन्या, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, मोजाम्बिक, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, तंजानिया, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और संयुक्त अरब अमीरात के नौसैनिकों ने भाग लिया। विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और सैन्य परंपराओं के बावजूद इन सभी देशों का साझा लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और सहयोगपूर्ण बनाना था।
आईएनएस सुनयना ने अपने मिशन के दौरान बांग्लादेश के चट्टोग्राम बंदरगाह का दौरा किया। यहां भारत और बांग्लादेश की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई संयुक्त गतिविधियाँ, पेशेवर संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। 12 मई को चट्टोग्राम बंदरगाह से अगले चरण के मिशन के लिए प्रस्थान करते समय बांग्लादेश नौसेना ने आईएनएस सुनयना को औपचारिक विदाई दी। यह दृश्य दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक विश्वास और समुद्री सहयोग का प्रतीक माना गया।
इसके बाद यह युद्धपोत श्रीलंका के कोलंबो की ओर बढ़ा। क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारत अवैध हथियारों की तस्करी और संगठित अपराध से निपटने के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी कर रहा है। वास्तव में, विश्व भर में आतंकवाद, संघर्ष और आपराधिक गतिविधियों में अवैध हथियारों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत ने 16 फरवरी को एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें एशिया-प्रशांत के 15 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य हथियारों की ट्रैकिंग प्रणाली को बेहतर बनाना, क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और अवैध हथियारों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना था। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, फिजी, ईरान, किरिबाती, किर्गिज गणराज्य, लाओस, लेबनान, मंगोलिया, मलेशिया, फिलीपींस और थाईलैंड के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलकदमी न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करती हैं, बल्कि भारत को हिंद महासागर और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित करने में भी मदद करती हैं।