'प्रक्रिया ही सजा बन जाती है', चिदंबरम का बयान उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज होने पर

'प्रक्रिया ही सजा बन जाती है', चिदंबरम का बयान उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज होने पर

नई दिल्ली, 20 मई। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। खालिद ने अपने दिवंगत मामा के चेहलुम में शामिल होने और अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए 15 दिनों की जमानत मांगी थी। इस पर कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उमर खालिद को फिर से जमानत नहीं दी गई, यहां तक कि उनकी मां के चिकित्सा संबंधित कार्यों में मदद करने के लिए भी 15 दिनों की अंतरिम जमानत को भी ठुकरा दिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायमूर्ति कृष्ण अय्यर का सिद्धांत जो 1977 में स्थापित हुआ था, अब केवल कानून की पुस्तकों में ही देखने को मिलता है, जबकि असली मामलों में यह लागू नहीं होता। ट्रायल कोर्ट्स ऐसा लगता है कि सोचते हैं कि "हम पुलिस के कहने पर आरोपी को जेल भेज देंगे और आरोपी फिर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय से जमानत ले लेगा।"

चिदंबरम ने आगे कहा कि ऐसा करना अपने कर्तव्य का निर्वहन न करना है। अगर ट्रायल कोर्ट्स अपने दायित्वों को निभाते हैं और कानून को सही तरीके से लागू करते हैं, तो उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालयों पर दबाव कम हो जाएगा। इससे हजारों अंडरट्रायल कैदियों को बिना आरोप तय, मुकदमा किए और सजा पाए जेल में बर्बाद नहीं होना पड़ेगा। सही ही कहा गया है कि "प्रक्रिया ही सजा बन जाती है।"

उमर खालिद ने अदालत को बताया कि उनके परिवार में पिता, मां और पांच बहनें हैं, लेकिन उनके 71 वर्षीय पिता मां की देखभाल नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी चार बहनें शादीशुदा हैं और अलग-अलग स्थानों पर रहती हैं, जिससे वह ही अपनी मां की सर्जरी के लिए सबसे बड़े और इकलौते बेटे के तौर पर देखभाल कर सकते हैं।

याचिका में ये भी उल्लेख किया गया कि खालिद को पहले भी कई बार अंतरिम जमानत मिल चुकी है, और उन्होंने हर बार अदालत की सभी शर्तों का पालन किया है एवं समय पर समर्पण किया है।

बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि सह-आरोपी तस्लीम अहमद, शिफा उर रहमान और अथर खान को भी पारिवारिक कारणों के आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी, इसलिए समानता के तहत उमर खालिद को भी जमानत मिलनी चाहिए।

वहीं, विशेष लोक अभियोजक ने जमानत याचिका के विरोध में कहा कि आरोपी न्यायालय की उदारता का गलत फायदा उठा रहा है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि पहले जिन कारणों को जमानत देने के लिए पर्याप्त माना गया था, इस बार दिए गए कारण वे नहीं हैं।