पीओके में पुलवामा हमले का प्रमुख संदिग्ध हमजा बुरहान ढेर

पीओके में पुलवामा हमले का प्रमुख संदिग्ध हमजा बुरहान ढेर

नई दिल्ली, 21 मई। पुलवामा हमले के मुख्य साजिशकर्ता हमजा बुरहान को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अज्ञात हमलावरों ने मार डाला है। यह घटना मुजफ्फराबाद में हुई, जहां उस पर कई गोलियां चलाई गईं। गोलियों से घायल होकर वह मौके पर ही दम तोड़ गया। भारत सरकार ने 2022 में उसे आतंकवादी घोषित किया था और कहा था, 'अरजुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर, 23 वर्ष का निवासी खारबतपोरा, रत्नीपोरा, पुलवामा है, जो अल-बद्र आतंकी संगठन का सदस्य है, जिसे यूएपीए के तहत प्रतिबंधित किया गया है।'

हमजा, जिसे 'डॉक्टर' के नाम से भी जाना जाता था, पुलवामा के रत्नीपोरा क्षेत्र में जन्मा था। उसने 2017 में उच्च शिक्षा की तलाश में पाकिस्तान जाने का दावा किया, लेकिन वहां जाकर वह आतंकी संगठन अल-बद्र में शामिल हो गया और तेजी से कमांडर की भूमिका हासिल कर ली।

अल-बद्र में शामिल होने के बाद वह कश्मीर लौट आया। उस पर आरोप था कि वह दक्षिण कश्मीर के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित कर रहा था और उन्हें आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए उकसा रहा था। उसका मुख्य नेटवर्क दक्षिण कश्मीर में सक्रिय था।

कश्मीर में उसका प्रभाव पुलवामा से शोपियां तक फैला हुआ था। उसकी मौत पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों के लिए एक गंभीर झटका बताई जा रही है। वह उन प्रमुख व्यक्तियों में से एक था, जो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तान-आधारित आतंकवादी संगठनों के लिए काम कर रहा था।

पुलवामा हमला भारत के सबसे घातक आतंकवादी हमलों में से एक था। 14 फरवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीआरपीएफ के जवानों के काफिले पर हमला किया गया था। लेथपोरा क्षेत्र में एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरे वाहन से बस को टक्कर मारी, जिससे 40 जवान शहीद हुए थे।

इस हमले का श्रेय जैश-ए-मोहम्मद को दिया गया, और हमलावर की पहचान आदिल अहमद डार के रूप में हुई थी। इस घटना के बाद भारत की वायुसेना ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर जवाबी कार्रवाई की थी।

रिपोर्टों के अनुसार, हाल के वर्षों में पाकिस्तान में कई आतंकवादियों को अज्ञात हमलावरों ने लक्ष्य बनाया है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इन घटनाओं पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और जांच को लेकर भी चुप्पी साधी हुई है।

पिछले दो वर्षों में इन घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी गई है। शीर्ष आतंकवादियों और नेताओं को निशाना बनाए जाने से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को पुनर्गठन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से इन दोनों आतंकवादी समूहों को काफी नुकसान हुआ है। वे अपनी गतिविधियों को अंजाम देने में असमर्थ हैं। ऐसी हत्याएं उनके मनोबल को काफी प्रभावित कर रही हैं और इससे जुड़ने वाले नए सदस्यों की संख्या भी कम हो रही है।