पीएम विश्वकर्मा योजना का बंगाल में शीघ्र कार्यान्वयन, केंद्र और राज्य में वार्ता जारी

पीएम विश्वकर्मा योजना का बंगाल में शीघ्र कार्यान्वयन, केंद्र और राज्य में वार्ता जारी

कोलकाता, 23 मई। भारत के लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने 22 मई को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के साथ पीएम विश्वकर्मा योजना को लागू करने के लिए बैठक की।

इस योजना की शुरुआत भारत सरकार ने 17 सितंबर, 2023 को की थी, और पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में राज्य में इसके कार्यान्वयन के लिए निगरानी समिति एवं जिला कार्यान्वयन समितियों का गठन करने का अधिसूचना जारी किया है।

बैठक का मुख्य उद्देश्य योजना के कार्यान्वयन को गति देना, लाभार्थियों की पहचान में सुधार, कौशल विकास को बढ़ावा देना और पारंपरिक कारीगरों तथा शिल्पकारों तक पहुंच बढ़ाना रहा। इसके अलावा, राज्य में अन्य एमएसएमई योजनाओं को लागू करने और बेहतर समन्वय के माध्यम से एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिसे भारत सरकार पूरी तरह से फंड कर रही है, जिसकी प्रारंभिक राशि 13,000 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। यह योजना 17 सितंबर, 2023 से शुरू होकर 2027-28 तक पांच वर्षों के लिए लागू होगी।

इसका मुख्य उद्देश्य कारीगरों एवं शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और उनकी घरेलू तथा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी सुनिश्चित करना है। शुरुआत में, इस योजना में 18 प्रकार के व्यवसायों में लगे कारीगरों और शिल्पकारों को लक्षित किया गया है।

यह योजना कारीगरों और शिल्पकारों को विश्वकर्मा के रूप में मान्यता देने की दिशा में भी कार्य कर रही है, ताकि वे सभी लाभ प्राप्त कर सकें और उनके कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण तथा समुचित अवसर उपलब्ध कराया जा सके।

साथ ही, लाभार्थियों को आसान ऋण उपलब्ध कराने और ब्याज छूट प्रदान करने से ऋण की लागत को कम किया जाएगा। डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए विश्वकर्माओं को डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन मिलेगा तथा उन्हें ब्रांडिंग और मार्केटिंग में सहायता के लिए एक मंच तैयार किया जाएगा।