नई दिल्ली, 21 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पांच देशों की यात्रा से लौटने के बाद यूएई में वहां के नेताओं को भारत के विशेष उपहार दिए। इस दौरान उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति, क्राउन प्रिंस और क्वीन मदर को तोहफे भेंट किए।
पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को विशेष 'रोगन पेंटिंग' (ट्री ऑफ लाइफ) भेंट की।
'रोगन पेंटिंग' गुजरात के कच्छ क्षेत्र की एक अनूठी कला है, जो अपनी बारीकी और चमकदार रंगों के लिए प्रसिद्ध है। इसमें 'ट्री ऑफ लाइफ' का प्राचीन और प्रतीकात्मक डिज़ाइन जीवन, संबंध, शक्ति और निरंतरता का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी जड़ें धरती में होती हैं और शाखाएं आसमान में जाती हैं, जो परंपरा और विकास के बीच संतुलन व्यक्त करती हैं, जो यूएई की सोच से मेल खाती है। इसमें उपयोग किए गए रंग कपड़े पर उभरे हुए और चमकदार होते हैं।
इसके साथ ही, पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को भारत का प्रसिद्ध 'केसर आम' और 'मेघालय अनानास' भी भेंट किया।
'केसर आम' गुजरात का एक विशेष जीआई टैग वाला आम है, जिसे 'आमों की रानी' के नाम से भी जाना जाता है। इसकी उत्पत्ति जूनागढ़ से मानी जाती है और इसका गूदा सुनहरे-नारंगी रंग का, रेशेहीन और अत्यधिक सुगंधित होता है। यह आम गुजरात में खास अवसरों पर 'आमरस' के रूप में परोसा जाता है, जो वहां की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है।
मेघालय अनानास : इस जीआई टैग वाले अनानास को दुनिया के सबसे अच्छे फलों में से एक माना जाता है। यह फल मेघालय की पहाड़ी और साफ-सुथरी जमीन पर उगता है, और इसका स्वाद मीठा और सुगंधित होता है। इसके खट्टेपन की मात्रा कम होती है, और यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इसमें ब्रॉमेलैन नामक एंजाइम होता है, जो पाचन में सहायता करता है। इसमें विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है।
पीएम मोदी ने यूएई के क्राउन प्रिंस के लिए 'कोफ्तगिरी खंजर' और 'मिथिला मखाना' के उपहार भी दिए।
कोफ्तगिरी खंजर एक परंपरागत औपचारिक खंजर है, जिस पर कोफ्तगिरी कला का सुंदर काम किया गया है। यह राजस्थान के उदयपुर में स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए जाने वाली एक दुर्लभ हस्तकला का उदाहरण है। इसमें लोहे में सोने और चांदी के तारों से फूलों व ज्यामितीय आकृतियों के डिज़ाइन बनाए जाते हैं। यह खंजर साहस, सम्मान और शाही विरासत का प्रतीक है और भारत तथा यूएई के बीच के संबंध को दर्शाता है।
मिथिला मखाना बिहार के मिथिला क्षेत्र का एक विशेष उत्पाद है और इसे जीआई टैग भी प्राप्त है। यह तालाबों और जलाशयों में उगता है। ये हल्के, कुरकुरे और पौष्टिक होते हैं और इनमें प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसका उपयोग स्नैक्स और धार्मिक परंपराओं में भी किया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई की क्वीन मदर को भी उपहार भेंट किए, जिनमें 'करीमनगर फिलिग्री संदूक', 'महेश्वरी सिल्क कपड़ा' और 'चक हाओ चावल' शामिल थे।
करीमनगर फिलिग्री संदूक तेलंगाना की प्रसिद्ध नक्काशी धातु कला का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो चांदी की बारीक और सुंदर डिजाइनिंग के लिए जानी जाती है। यह संदूक शाही जुलूस के दृश्य को दर्शाता है, जिसमें हाथी और हौदा शामिल होते हैं। यह कला का नमूना होने के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है।
महेश्वरी सिल्क कपड़ा मध्य प्रदेश के महेश्वर से उत्पन्न एक सुंदर हैंडलूम उत्पादन है, जो हल्का, मुलायम और हल्की चमक वाला होता है। इसे सिल्क और कॉटन को मिला कर बनाया जाता है। रानी अहिल्याबाई होलकर ने 18वीं सदी में इस परंपरा को बढ़ावा दिया था, और इसकी विशेषता इसका 'रिवर्सिबल बॉर्डर' है।
चक हाओ चावल, जिसे मणिपुर के 'काले चावल' के नाम से जाना जाता है, पूर्वोत्तर भारत की उपजाऊ मिट्टी से उत्पन्न एक मूल्यवान चावल की किस्म है। इसे पारंपरिक रूप से मणिपुर के 'शाही चावल' के रूप में माना जाता था। यह चावल अपने स्वाद और गहरे बैंगनी रंग के लिए प्रसिद्ध है, और इसके पोषक तत्वों के कारण इसे अत्यधिक महत्व दिया जाता है।