पीएम मोदी ने नॉर्वे के राजा को भेंट की कटक की प्रतिष्ठित 'तारकसी' नाव, कारीगरों में खुशी

पीएम मोदी ने नॉर्वे के राजा को भेंट की कटक की प्रतिष्ठित 'तारकसी' नाव, कारीगरों में खुशी

कटक, 22 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओडिशा की अद्भुत हस्तशिल्प संस्कृति को उजागर किया है। उन्होंने नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम को कटक की पारंपरिक 'तारकसी' कला में निर्मित एक चांदी की नाव भेंट की। कटक का यह खास तारकसी काम केवल एक कला नहीं, बल्कि ओडिशा की धरोहर, गौरव और सदियों से चली आ रही कारीगरी का प्रतीक है। यह चांदी की खूबसूरत नाव 'तारकसी' कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसे भारत की 'सिल्वर सिटी' के रूप में जाना जाता है। यह नाजुक कला 500 से अधिक वर्षों से चली आ रही है, जिसमें चांदी के तारों को बारीकी से मोड़कर तथा जोड़कर जटिल डिजाइन बनाई जाती है। यह असाधारण सटीकता और कारीगरी का अद्वितीय प्रदर्शन है।

इस हाथ से बनाई गई नाव ओडिशा की समृद्ध समुद्री परंपरा को दर्शाती है और यह प्राचीन भारतीय व्यापारियों की समुद्री यात्राओं की याद दिलाती है, जो हिंद महासागर पार कर दूर देशों तक जाते थे।

यह उपहार व्यक्तिगत महत्व भी रखता है, क्योंकि यह राजा हेराल्ड पंचम के नौकायन के प्रति अटूट प्रेम और ओलंपिक खेलों में नॉर्वे का प्रतिनिधित्व करने की उनकी भूमिका को भी दर्शाता है।

इस उपहार से कटक के कारीगरों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। कारीगर विजय कुमार दे ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी कारीगरी अब वैश्विक मंच तक पहुंच रही है और ओडिशा की पारंपरिक कला को मान्यता मिल रही है। इससे उनके काम को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस कला में कड़ी मेहनत और बारीकी से काम करने की आवश्यकता होती है।

उत्कल स्वर्ण रूप संघ के सचिव गिरीश चंद्र प्रुस्ती ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जिस प्रकार देश की पारंपरिक कारीगरी और हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दे रहे हैं, यह एक सराहनीय कदम है। इससे कारीगरों को नई पहचान और उनके काम को वैश्विक मान्यता मिल रही है। इससे कारीगरों के लिए बेहतर बाजार का अवसर भी बनेगा, लेकिन उन्होंने चिंता व्यक्त की कि चांदी की कीमतों में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे लागत बढ़ रही है। यह कई बार खरीददारी को प्रभावित करता है, जो कारीगरों के लिए चुनौती बन जाता है। इसके अलावा, नई पीढ़ी इस कला को सीखने में कम रुचि ले रही है।

गिरीश चंद्र प्रुस्ती ने बताया कि कटक की यह पारंपरिक सिल्वर कला बहुत पुरानी और विख्यात है, जिसे मुगलों के समय से देखा जा सकता है। यह पूरी तरह से कटक में केंद्रित है और ओडिशा के अन्य क्षेत्रों में इसे कम ही पाया जाता है। इसलिए, इसे संरक्षित और आगे बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।