नई दिल्ली, 21। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात, इटली, नीदरलैंड, स्वीडन, और नॉर्वे की यात्रा समाप्त कर देश लौटे। इस दौरान, पीएम मोदी ने कई महत्वपूर्ण रणनीतिक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भी खास उपहार दिए, जिसने दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत और संबंधों को नए आयाम दिए। पीएम मोदी ने उन्हें मूगा सिल्क स्टोल और शिरुई लिली सिल्क स्टोल भेंट किए। मूगा सिल्क, जिसे असम के 'गोल्डन सिल्क' के नाम से जाना जाता है, भारत के पूर्वोत्तर भाग की ब्रह्मपुत्र घाटी से जुड़ा हुआ एक अनमोल और प्रसिद्ध वस्त्र है। इसकी विशेषता इसके प्राकृतिक सुनहरे रंग और साधारण रॉयल्टी में निहित है। यह सिल्क बिना किसी कृत्रिम रंग के तैयार किया जाता है और इसे दुनिया के सबसे मजबूत प्राकृतिक रेशों में से एक माना जाता है। इसकी मजबूती और दीर्घकालिकता के लिए इसे सराहा जाता है, और यह कई पीढ़ियों तक सुरक्षित रहता है। समय के साथ, इसकी प्राकृतिक चमक विकसित होती है, जबकि नमी अवशोषित करने और UV-प्रतिरोधी गुण इसे और अधिक आरामदायक बनाते हैं। इटली की विशिष्ट वस्त्र परंपरा और असम के 'गोल्डन सिल्क' की भव्यता में एक अनोखा तालमेल देखने को मिलता है।
पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को शिरुई लिली सिल्क स्टोल भी दिया। यह स्टोल मणिपुर के शिरुई काशोंग पर्वत की धुंध भरी पहाड़ियों से प्रेरित है। शिरुई लिली, जो घंटी के आकार का एक फूल है और जिसकी पंखुड़ियां हल्के गुलाबी-सफेद रंग की होती हैं, खासतौर पर मणिपुर में पाई जाती है। यह फूल वहां के तंगखुल नगा समुदाय के लिए पवित्रता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इसलिए, यह स्टोल न केवल हिमालयी कारीगरी का परिचायक है, बल्कि इसमें क्षेत्र की स्थानीय परंपराएं और लोककथाएं भी समाहित हैं। लिली का इटली में भी गहरा सांस्कृतिक महत्व है, जहां इसे पवित्रता, सौम्यता और कलात्मकता का प्रतीक माना जाता है, जिसका उल्लेख पुनर्जागरण काल की कलाकृतियों में अक्सर मिलता है। इसी साझा प्रतीकात्मकता के माध्यम से भारत और इटली के बीच एक अनूठा सांस्कृतिक संबंध विद्यमान है।
साथ ही, पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला को आगरा की प्रसिद्ध पच्चीकारी कला से बना एक मरमर का इनले वर्क बॉक्स और पंडित भीमसेन जोशी एवं एमएस सुब्बुलक्ष्मी की सीडी भी भेंट की। यह संगमरमर का बक्सा भारत के हस्तशिल्प कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आगरा के कुशल कारीगरों द्वारा निर्मित किया गया है। 'पच्चीकारी' या 'पिएत्रा ड्यूरा' कला की उत्पत्ति इटली के फ्लोरेंस शहर से होती है, जो बाद में भारत में राजकीय संरक्षण में विकसित हुई, इस प्रकार यह दोनों देशों के बीच कला का एक अद्भुत पुल बन गई।