पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन, पंचायत निकायों के लिए पांच सदस्यीय टीम नियुक्त

पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन, पंचायत निकायों के लिए पांच सदस्यीय टीम नियुक्त

लखनऊ, 20 मई। उत्तर प्रदेश की सरकार ने स्थानीय ग्रामीण निकायों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अध्ययन और सुझाव देने के लिए एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। इस संबंध में बुधवार को पंचायतीराज अनुभाग-3 द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई।

अधिसूचना के तहत, राज्यपाल की मंजूरी के बाद आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की गई है। आयोग के अध्यक्ष के रूप में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह का चयन किया गया है। इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और पूर्व आईएफएस अधिकारी एसपी सिंह को सदस्य के रूप में नामित किया गया है।

इस आदेश को प्रमुख सचिव अनिल कुमार द्वारा जारी किया गया है। आदेश में कहा गया है कि अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति उनके कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से छह महीने तक प्रभावी रहेगी। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए मानदेय, भत्ते और अन्य सुविधाओं को लेकर अलग से निर्देश दिए जाएंगे।

यह अधिसूचना पंचायतीराज अनुभाग-3 की पूर्व अधिसूचना संख्या 1274/33-3-2026 दिनांक 18 मई 2026 के तहत जारी की गई है।

ज्ञात हो कि प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारी के तहत, सरकार ने आवश्यक उपाय तेज कर दिए हैं। पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की स्थापना की अधिसूचना जारी की गई थी।

ध्यान दिया जा रहा है कि आयोग की सिफारिशों के आधार पर पंचायत चुनावों में आरक्षण का अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा। सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि आयोग अपनी रिपोर्ट को निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकार को प्रस्तुत करेगा। यदि आवश्यक हुआ तो सरकार आयोग के कार्यकाल या रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा बढ़ा सकती है। आयोग पंचायतों में पिछड़ा वर्ग की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी के आंकड़ों और संवैधानिक प्रावधानों का परीक्षण करेगा।