पटना में साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। साइबर थाना पुलिस ने एक संगठित साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से कई मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चेकबुक, लैपटॉप और बैंकों से जुड़ी सामग्री बरामद की है। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है।
डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने कहा कि हाल ही में पुलिस को कई शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ साइबर अपराधी लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और आसान ऋण देने का लालच देकर उनके नाम पर बैंक में करेंट अकाउंट खुलवा रहे थे। इसके बाद आरोपी संबंधित पासबुक, एटीएम कार्ड, बैंक विवरण, सिम कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपने पास रख लेते थे, जिनका उपयोग बाद में साइबर ठगी में किया जाता था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी के मार्गदर्शन में साइबर थाना के लिए एक विशेष टीम बनाई गई। इस टीम का नेतृत्व डीएसपी एवं साइबर थाना प्रभारी नीतीश चंद्र धारिया ने किया। तकनीकी और मानव संसाधन की सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के जकरियापुर में एक आवास से साइबर अपराध गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान नालंदा जिले के नूरसराय के निवासी संजय कुमार और नवादा जिले के पकड़ी बरवा के निवासी अभिषेक कुमार के रूप में हुई है।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 12 एटीएम कार्ड, 13 चेकबुक और एक पासबुक बरामद की। पुलिस का कहना है कि बरामद किए गए दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों का पूरी तरह से मूल्यांकन किया जा रहा है। जांच में कई बैंकों के माध्यम से बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन के सबूत मिले हैं।
डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि आरोपियों के नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में एक महिला समेत अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह ने किन-किन राज्यों में लोगों को शिकार बनाया और कितने लोगों से ठगी की गई। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।