अमेरिका और ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें अब मुश्किलों में घिरती नजर आ रही हैं। एक तरफ अमेरिका पाकिस्तान की मध्यस्थता को खास तवज्जो नहीं दे रहा, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ईरान को बातचीत के लिए मनाने में सफल नहीं हो पाए हैं। ऐसे हालात में पाकिस्तान अब चीन के समर्थन की उम्मीद लेकर बीजिंग पहुंचा है।
बीजिंग पहुंचे शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर
चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इस बैठक में अमेरिका-ईरान तनाव को कम करने और संभावित समाधान पर चर्चा की गई। यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे ठीक पहले आसिम मुनीर ईरान की राजधानी तेहरान में कई अहम बैठकों में शामिल हुए थे।
तेहरान में हुईं गुप्त बैठकें
रिपोर्ट्स के अनुसार, जनरल आसिम मुनीर और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान में ईरानी सैन्य अधिकारियों और शीर्ष नेताओं के साथ कई दौर की बंद कमरे की बैठकें कीं। बताया जा रहा है कि इन बैठकों का उद्देश्य कतर और पाकिस्तान द्वारा तैयार किए गए 30 दिनों के युद्धविराम प्रस्ताव पर ईरान की सहमति हासिल करना था। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस सफलता सामने नहीं आई है।
चीन से सहयोग की उम्मीद
बीजिंग में हुई बैठक के दौरान शहबाज शरीफ ने कहा कि दुनिया इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है और बातचीत ही समाधान का रास्ता है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच “ईमानदार मध्यस्थ” की भूमिका निभाने की कोशिश की है। साथ ही उन्होंने शांति प्रक्रिया में सहयोग के लिए चीन का धन्यवाद भी किया। शहबाज शरीफ ने कहा, “चीजें सही दिशा में बढ़ रही हैं और हम उम्मीद करते हैं कि बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा।”
पर्दे के पीछे सक्रिय है चीन
सूत्रों के मुताबिक, चीन शुरुआत से ही इस पूरे संकट में पर्दे के पीछे सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इससे पहले इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश भी की गई थी, लेकिन कोई बड़ा नतीजा नहीं निकल सका। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि शुरुआती युद्धविराम के दौरान चीन ने ईरानी अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा और कई फोन कॉल के बाद ही ईरान बातचीत के लिए तैयार हुआ था।
तेल संकट ने बढ़ाई दुनिया की चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता नहीं होने से वैश्विक तेल बाजार पर भी असर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत समेत कई देशों की नजर अब इस संकट पर टिकी हुई है। चीन भी इस स्थिति से परेशान बताया जा रहा है क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका लगातार बनी हुई है।
ट्रंप ने दिए समझौते के संकेत
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
हालांकि ईरान अब भी अमेरिका पर “अनुचित शर्तें” थोपने का आरोप लगा रहा है, जबकि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाए बिना किसी समझौते के लिए तैयार नहीं दिख रहा।