नई दिल्ली, 23 मई। 'ऑपरेशन महादेव' के अंतर्गत पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादियों को ढेर किया गया। इससे न केवल पहलगाम हमले के शिकारों को न्याय मिला, बल्कि 20 अक्टूबर 2024 को गगनगीर में हुए आतंकी हमले के पीड़ितों को भी न्याय मिला। एनआईए ने पहलगाम हमले की जांच करते हुए गगनगीर हमले का संबंध स्थापित किया, जिसमें सात व्यक्तियों की जान गई थी। बैलिस्टिक परीक्षण से यह सामने आया कि इन दोनों स्थानों से मिले कारतूस एक ही एम-4 कार्बाइन से फायर किए गए थे। यह हथियार उन सुरक्षा बलों द्वारा बरामद किया गया, जिन्होंने 'ऑपरेशन महादेव' को अंजाम दिया था।
20 अक्टूबर 2024 को पाकिस्तानी आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के गगनगीर में जेड-मोड़ सुरंग के निकट एपीसीओ इंफ्राटेक के श्रमिकों के कैंप पर हमला किया। इन आतंकवादियों ने डाइनिंग मेस के भीतर गोलीबारी की, जिससे एक डॉक्टर समेत सात लोग मारे गए।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि दोनों हमले एक ही मॉड्यूल द्वारा किए गए थे। एनआईए को यह भी पता चला कि हमलों की योजना और उन्हें संचालित करने वाले सभी लोग एक ही समूह से संबंधित थे।
लश्कर-ए-तैयबा के छद्म समूह 'द रजिस्टेंस फ्रंट' ने पहले पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन बाद में उन्होंने इससे मुंह मोड़ लिया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन्हें भारत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया का डर था। बावजूद इसके, भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का आयोजन किया, जिसके चलते आतंकवादी ढांचे को नष्ट कर दिया गया।
एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान की संलिप्तता पहले ही साबित हो चुकी थी और इस बार की सजा भी कठोर थी।
एनआईए की जांच में यह भी सामने आया कि गगनगीर हमले में शामिल फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान ने पहलगाम हमले को भी अंजाम दिया था। उसे और उसके दो सहयोगियों- हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी को 28 जुलाई 2025 को मार गिराया गया, जब सुरक्षा एजेंसियों ने 'ऑपरेशन महादेव' का क्रियान्वयन किया।
इस ऑपरेशन के फॉलो-अप में सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों से दो AK-47 और एक एम-4 कार्बाइन बरामद की। एनआईए की जांच ने डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, बैलिस्टिक रिपोर्ट, आईपी ट्रैकिंग और सोशल मीडिया रिकॉर्ड के आधार पर इन दोनों हमलों में पाकिस्तान की सीधी संलिप्तता को स्पष्ट किया।
जांच के दौरान एक पैटर्न उभरकर आया था, जो 2023 से जम्मू-कश्मीर में देखा गया था। यह वही मॉड्यूल था जो घाटी में अन्य हमले भी कर चुका था।
'ऑपरेशन महादेव' के दौरान मारे गए तीनों पाकिस्तानी आतंकवादी 2023 से घाटी में सक्रिय थे। वे हमले करते थे और फिर निर्देश मिलने तक घने जंगलों में छिप जाते थे।
21 दिसंबर 2023 को पुंछ जिले में सेना पर किए गए हमले के लिए भी यही मॉड्यूल जिम्मेदार था, जिसमें पांच सैनिकों की जान गई थी। 4 मई 2024 को पुंछ के शाहसितार-सनाई में वायुसेना के काफिले पर हमला किया गया, जिसमें एक जवान हताहत हुआ। 9 जून 2024 को रियासी जिले में शिव खोड़ी से लौट रहे तीर्थयात्रियों की बस पर आतंकियों ने गोलीबारी की। इन सभी हमलों की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के 'द रजिस्टेंस फ्रंट' ने ली थी।
एक अधिकारी ने बताया कि इन सभी हमलों की विधि एक समान थी। यह तीनों आतंकवादी घुसपैठ कर घाटी में छुपे हुए थे और निरंतर भागते रहे। वे नियमित अंतराल पर हमले करते थे और गायब होने के लिए घने जंगलों का सहारा लेते थे। घाटी के वातावरण में पूरी तरह से समाहित होने के कारण, वे गगनगीर और पहलगाम जैसे स्थानों पर हमले करने में माहिर हो चुके थे।
'ऑपरेशन महादेव' के दौरान मिले मोबाइल डेटा ने इन हमलों के पीछे की प्रक्रिया और उनके संबंध को स्पष्ट किया। 'द रजिस्टेंस फ्रंट' के आतंकवादियों को लश्कर-ए-तैयबा का एक सहायक, साजिद जट्ट उर्फ अली भाई, गुप्त संचार माध्यमों के जरिए निर्देश दे रहा था।
जट्ट को 'लंगड़ा' के नाम से भी जाना जाता है और यह सबसे अधिक वांछित आतंकवादियों की सूची में है। उसे जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने का कार्य सौंपा गया था।
खुफिया ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी ने बताया कि 'द रजिस्टेंस फ्रंट' के लिए ऑपरेशन का ताना-बाना तैयार करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी और उसने घाटी में कई सफल ऑपरेशनों को संपन्न करने में भी सफलता पाई थी।